Share Market Closing today: भारतीय शेयर बाजार ने 6 नवंबर 2026 को कमजोर ग्लोबल संकेतों के बावजूद शानदार वापसी की। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार सातवें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। BSE Sensex 1,718.01 अंक यानी 2.17% की तेजी के साथ 81,028.02 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 493.75 अंक यानी 2.01% की बढ़त रही और यह 25,030.35 के स्तर पर पहुंच गया। खास बात यह रही कि अमेरिकी टेक शेयरों में भारी बिकवाली और एशियाई बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में खरीदारी का जोर बना रहा। हालांकि, सेंसेक्स और निफ्टी की शानदार तेजी के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

Sensex Nifty में जोश
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। GIFT Nifty में गिरावट के संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 फिसलकर 24,388.05 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी बढ़ी और बाजार ने शानदार रिकवरी की। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 572 अंक और निफ्टी करीब 114 अंक ऊपर था। इसके बाद खरीदारी और तेज हुई। दोपहर 3 बजे सेंसेक्स 80,645.21 और निफ्टी 24,884.15 पर कारोबार कर रहे थे। अंतिम कारोबारी घंटों में भी तेजी जारी रही और बाजार 25,000 के अहम स्तर के ऊपर बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी की क्लोजिंग
6 नवंबर को बाजार बंद होने पर दोनों प्रमुख इंडेक्स में शानदार बढ़त दर्ज की गई।

इसके साथ ही भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार सातवें कारोबारी सत्र तक पहुंच गया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी और किनमें गिरावट?
निफ्टी 50 में ICICI Bank, M&M, HDFC Bank, Titan Company और Axis Bank सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में शामिल रहे, वहीं, Eicher Motors, Power Grid Corporation, Bharat Electronics, Adani Enterprises और Tata Motors Passenger Vehicles के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। सेक्टर के लिहाज से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी बैंक, फार्मा और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1 से 3% तक की तेजी रही। दूसरी तरफ एनर्जी, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण क्या रहे?
1. FII की करीब ₹15,000 करोड़ की रिकॉर्ड खरीदारी
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की जबरदस्त खरीदारी रही। 5 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कैश मार्केट में करीब ₹14,974.68 करोड़ के शेयर खरीदे। यह लगभग छह साल में उनकी सबसे बड़ी एकदिनी नेट खरीदारी थी। लगातार विदेशी निवेश आने से भारतीय शेयर बाजार को मजबूती मिली। इसके अलावा पिछले पांच कारोबारी सत्रों में FIIs की नेट खरीदारी करीब ₹35,809 करोड़ रही।
2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सुधरा सेंटीमेंट
कच्चे तेल की कीमतों में आई पिछली गिरावट ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने से भारत के महंगाई और इंपोर्ट बिल को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में नरमी से करंट अकाउंट डेफिसिट और रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ती है। हालांकि, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड में फिर तेजी आई और यह करीब 99.86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
3. बेहतर Q2 नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा
सितंबर तिमाही के कई कंपनियों के नतीजे भी बाजार को समर्थन दे रहे हैं। चुनिंदा कंपनियों के बेहतर नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। Mahindra & Mahindra के अलावा ICICI Bank, HDFC Bank और Titan जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन हैवीवेट शेयरों की तेजी ने प्रमुख इंडेक्स को ऊपर ले जाने में मदद की।
4. बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी
शुक्रवार की तेजी में बैंकिंग शेयरों का अहम योगदान रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में दोपहर के कारोबार में 2.25% की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी बैंक 1.54% चढ़कर 58,665 के स्तर पर पहुंच गया था। ICICI Bank और HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। फाइनेंशियल शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने से निफ्टी को 25,000 के ऊपर पहुंचने में मदद मिली।
5. विदेशी फंडों का भारतीय बाजार की ओर रुख
वैश्विक बाजारों में AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी बिकवाली के बीच भारतीय इक्विटी बाजार को विदेशी निवेश का समर्थन मिला। निवेशकों ने ग्लोबल टेक शेयरों में बढ़ते जोखिम के बीच भारतीय बाजार में अवसर तलाशे। बेहतर वैल्यूएशन और कंपनियों के नतीजों को भी इस रुझान की वजह माना जा रहा है।
ग्लोबल बाजारों में भारी गिरावट, फिर भी भारत में तेजी
भारतीय बाजार की तेजी इसलिए भी अहम है क्योंकि शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 करीब 6.4% गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8.8% तक लुढ़क गया। ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स में भी करीब 8.9% की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली थी। Nasdaq Composite 5.52% गिरकर बंद हुआ था। AI इंडस्ट्री पर संभावित सख्त रेगुलेशन और टेक कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर चिंताओं ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया। इसके बावजूद भारतीय बाजार में विदेशी निवेश और बैंकिंग शेयरों की खरीदारी ने तेजी को बनाए रखा।
DIIs ने की बिकवाली, बाजार की ब्रेड्थ कमजोर
सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी के बावजूद बाजार की व्यापक तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही। 5 नवंबर को FIIs ने जहां करीब ₹14,974.68 करोड़ की खरीदारी की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने लगभग ₹10,444.54 करोड़ की नेट बिकवाली की। 6 नवंबर को बाजार बंद होने पर 1,681 शेयर बढ़त में थे, जबकि 2,400 शेयर गिरावट में बंद हुए। इसके अलावा 148 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.2% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.8% गिरकर बंद हुए। इससे साफ है कि बाजार की तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों और चुनिंदा सेक्टरों तक सीमित रही।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
6 नवंबर की तेजी ने भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट को मजबूत किया है। निफ्टी का 25,000 के पार बंद होना और सेंसेक्स का 81,000 के ऊपर पहुंचना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, ग्लोबल बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव, कमजोर मार्केट ब्रेड्थ और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।आगे बाजार की दिशा तय करने में विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतें, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक आर्थिक संकेत अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल इंडेक्स की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न करें।
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