Noida, Greater Noida में Rent Agreement के लिए नहीं करनी होगी जेब ढीली, कम पड़ेगा ब्रोकरेज?

Noida और Greater Noida में किराए पर रहने वाले लोगों के लिए Rent Agreement बनवाना अब पहले के मुकाबले सस्ता हो सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 साल तक के रेंट और लीज एग्रीमेंट के लिए स्टांप ड्यूटी की नई दरों को मंजूरी दी है। इस बदलाव का मकसद किरायेदारों और मकान मालिकों को राहत देने के साथ ही रेंट एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था में शुल्क सालाना किराए और एग्रीमेंट की अवधि के आधार पर तय किया जाएगा।

Noida

पहले स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च अधिक होने के कारण कई मकान मालिक और किरायेदार रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराने से बचते थे। ऐसे में लोग अक्सर 11 महीने का नोटरी एग्रीमेंट बनवाकर काम चलाते थे। अब शुल्क कम होने से अधिक लोगों के लिए कानूनी रूप से रेंट एग्रीमेंट बनवाना आसान हो सकता है।

Rent Agreement New Rules: अब कितनी लगेगी स्टांप ड्यूटी?

नई दरों के तहत रेंट एग्रीमेंट पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी को सालाना किराए और समझौते की अवधि के अनुसार अलग-अलग स्लैब में बांटा गया है। अधिकतम 10 साल तक के एग्रीमेंट के लिए नई दरें तय की गई हैं।

औसत सालाना किराया:

  • 1 साल तक 1 से 5 साल तक 5 से 10 साल तक
  • ₹2 लाख तक ₹1,000 ₹2,000 ₹4,000
  • ₹2 लाख से ₹6 लाख तक ₹3,000 ₹6,000 ₹8,000
  • ₹6 लाख से ₹10 लाख तक ₹4,500 ₹10,000 ₹13,000

नोट: ऊपर दी गई राशि स्टांप ड्यूटी की है। रजिस्ट्रेशन फीस भी स्टांप ड्यूटी के बराबर होने के कारण कुल खर्च दोगुना हो सकता है।

अब ₹2,000 में बन सकता है रेंट एग्रीमेंट

नई दरों से होने वाली बचत को एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि नोएडा में किसी मकान का सालाना किराया ₹1.8 लाख है और किरायेदार एक साल का रेंट एग्रीमेंट बनवाना चाहता है। पुरानी व्यवस्था में ऐसे एग्रीमेंट के लिए कुल ₹10,000 तक का खर्च बताया गया था। नई दरों के तहत ₹1,000 स्टांप ड्यूटी और ₹1,000 रजिस्ट्रेशन फीस मिलाकर कुल खर्च ₹2,000 हो सकता है। यानी इस उदाहरण में ₹8,000 या 80% तक की बचत संभव है। इस बदलाव का फायदा केवल छोटे किराए वाले मकानों तक सीमित नहीं है। लंबी अवधि के लीज एग्रीमेंट कराने वाले मकान मालिकों और किरायेदारों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च एग्रीमेंट की अवधि, सालाना किराए और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

₹10 लाख से ज्यादा किराए पर क्या होगा?

अगर किसी प्रॉपर्टी का औसत सालाना किराया ₹10 लाख से अधिक है, तो नई रियायती दरों का लाभ पहले ₹10 लाख के किराए तक मिलेगा। इससे अधिक की राशि पर पुरानी दरें लागू होंगी। टोल और खनन से संबंधित लीज एग्रीमेंट इस छूट के दायरे में नहीं आते। इसलिए अधिक किराए वाली कमर्शियल प्रॉपर्टी या लंबी अवधि के लीज एग्रीमेंट के मामले में दस्तावेज बनवाने से पहले संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से शुल्क की पुष्टि करना जरूरी है।

Rent Agreement Registration: क्या रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है?

रेंट एग्रीमेंट केवल किराए और रहने की अवधि का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। इसमें मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बिजली-पानी के बिल, मेंटेनेंस, मकान खाली करने की शर्तें और नोटिस पीरियड जैसी जानकारी दर्ज होनी चाहिए। एक साल से अधिक अवधि के लीज एग्रीमेंट के लिए आमतौर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। उत्तर प्रदेश के किरायेदारी कानून के तहत भी एग्रीमेंट और संबंधित औपचारिकताओं का पालन करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर मामले में लागू कानूनी जरूरतें अलग हो सकती हैं, इसलिए एग्रीमेंट बनवाने से पहले नियमों की पुष्टि करनी चाहिए। रेंट एग्रीमेंट की सही तरीके से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने से भविष्य में किराए, सिक्योरिटी डिपॉजिट या मकान खाली कराने को लेकर विवाद होने पर दस्तावेजी सबूत मिल सकता है।

किरायेदार और मकान मालिक किन बातों का रखें ध्यान?

रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • एग्रीमेंट में किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि स्पष्ट लिखवाएं।
  • समझौते की अवधि और नोटिस पीरियड का उल्लेख करें।
  • बिजली, पानी, मरम्मत और सोसायटी मेंटेनेंस का खर्च कौन देगा, यह तय करें।
  • किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट के भुगतान का रिकॉर्ड रखें।
  • स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की मौजूदा दरों की पुष्टि करें।
  • एग्रीमेंट की हस्ताक्षरित कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की नई व्यवस्था नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए रेंट एग्रीमेंट का खर्च कम करने की दिशा में एक अहम कदम है। शुल्क कम होने से अधिक लोग रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करा सकते हैं, जिससे किरायेदारी में पारदर्शिता बढ़ने और विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, एग्रीमेंट बनवाने से पहले यह जरूर जांच लें कि संशोधित दरें आपके मामले में लागू हो चुकी हैं या नहीं।

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