मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: GSDP में 11.14% वृद्धि, समावेशी विकास की ओर तेज़ कदम

2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश का जीएसडीपी 8.04% की वास्तविक वृद्धि के साथ 16.69 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ने की बात कही गई है। कृषि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र संतुलित, समावेशी आर्थिक प्रगति में योगदान करते हैं, जिसे राजकोषीय अनुशासन और नीति दूरदर्शिता का समर्थन प्राप्त है।

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती की ओर बढ़ रही है। राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11.14 प्रतिशत की दर से बढ़कर 16.69 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। मंगलवार को भोपाल में विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में यह जानकारी दी गई।

Madhya Pradesh 2025-26 GSDP Growth

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के कारण मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और राज्य एक गतिशील अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर GSDP 7.81 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.23 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दर्शाता है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2011-12 में प्रति व्यक्ति आय 38,497 रुपये थी, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 1,69,050 रुपये हो गई है। स्थिर मूल्यों पर यह आय बढ़कर 76,971 रुपये पहुंच गई है।

क्षेत्रवार योगदान की बात करें तो वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। प्राथमिक क्षेत्र में फसलों का योगदान सबसे अधिक 30.17 प्रतिशत रहा, जबकि पशुधन, वानिकी, मत्स्यपालन और खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

द्वितीयक क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र का योगदान 9.22 प्रतिशत, विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत और ऊर्जा एवं उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत रहा। वहीं तृतीयक क्षेत्र में व्यापार, होटल और रेस्टोरेंट का योगदान सबसे अधिक 10.35 प्रतिशत रहा। इसके अलावा अन्य सेवाएं, अचल संपत्ति, लोक प्रशासन, वित्तीय सेवाएं, परिवहन और संचार क्षेत्र ने भी अर्थव्यवस्था को गति दी।

राज्य के लोक वित्त की स्थिति भी संतुलित बनी हुई है। वर्ष 2025-26 में 2,618 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

कृषि क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दुग्ध उत्पादन बढ़कर 225.95 लाख टन पहुंच गया है। ग्रामीण विकास के तहत 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण और 40.82 लाख ग्रामीण आवासों का निर्माण पूरा किया गया।

औद्योगिक क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है। राज्य में 1,028 औद्योगिक इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिनमें 1.17 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हो रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज की गई और पर्यटकों की संख्या 13.18 करोड़ तक पहुंच गई।

नगरीय विकास के तहत हजारों परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं और लाखों आवासों का निर्माण पूरा किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान कार्ड जारी करने और मातृ मृत्यु दर में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

शिक्षा क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। शिक्षा के लिए कुल बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित किया गया है और तकनीकी संस्थानों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था संतुलित, समावेशी और तेज गति से आगे बढ़ रही है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में समानांतर प्रगति से राज्य देश की उभरती हुई मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में अपनी पहचान बना रहा है।

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