India's Indigenous Missile Power : दुनिया में बढ़ते संघर्ष के बीच खुद को दूसरों से आगे और सुरक्षित रखने के प्रयास के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण मिल का पत्थर हासिल किया है। भारत ने विदेशों से निर्भरता खत्म कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाया है।

दरअसल, अपने रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में तेजी से जुटा भारत ने बीते 23 अगस्त को भारत ने IADWS (indigenous Integrated Air Defence Weapon Systems, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम) का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण पर दुनियाभर की निगाहें टिकी थी। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का सातवां देश बन गया है।
IADWS को DRDO, अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई), उच्च ऊर्जा प्रणाली और विज्ञान केंद्र (सीएचईएसएस) ने साथ मिलकर विकसित किया है। IADWS एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिनमें स्वदेशी क्विक रिएक्शन सतह-से-वायु मिसाइल (QRSAM), बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS) मिसाइलें और हाई-पावर लेजर-आधारित डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) प्रणाली शामिल हैं। इसका सफल परीक्षण शनिवार को ओडिशा के तट पर की गई थी।
IADWS की खासियत
QRSAM :- यह एक तेज प्रतिक्रिया वाली सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली है, जो 3 से 30 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने में सक्षम है।
VSHORADS :- यह मिसाइल प्रणाली कम दूरी पर आने वाले खतरों, जैसे ड्रोन और हेलीकॉप्टर आदि, के खिलाफ प्रभावी है।
DEW :- यह लेजर आधारित हथियार है, जो लाइट (प्रकाश) की गति से दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को बहुत तेजी से नष्ट कर सकता है। इस हथियार का बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है और यह अत्यंत सटीक निशानेबाजी करता है।
भारत ने अब तक कौन-कौन से स्वदेशी मिसाइलें विकसित की हैं?
भारत की कुछ प्रमुख स्वदेशी मिसाइलें (List of Missiles in India) अग्नि (बैलिस्टिक), पृथ्वी (बैलिस्टिक), आकाश (सतह से हवा), नाग (टैंक-रोधी), त्रिशूल (सतह से हवा) और ब्रह्मोस (क्रूज) हैं। इसके अलावा शौर्य, धनुष, अमोघा, और हेलिना, पिनाका जैसी अन्य मिसाइलें भी भारत के स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
किन देशों के पास है इंटीग्रेटेड स्वदेशी मिसाइल सिस्टम?
स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) वाले देशों में अब भारत शामिल हो गया है। इससे पहले केवल इज़राइल, चीन, अमेरिका, रूस, फ्रांस, इटली और जर्मनी के पास ऐसी सुविधाएं मौजूद हैं। इज़राइल की आयरन डोम और बराक मिसाइल सिस्टम, चीन की HQ-9, अमेरिका की पैट्रियट और MEADS, रूस का S-300VM/Ante-2500 और S-400 और फ्रांस व इटली का Aster 30 SAMP/T मिसाइल सिस्टम है।
मेक इन इंडिया पहल से रक्षा विकास को बढ़ावा; डिफेंस बजट में उछाल
भारत का रक्षा उत्पादन 'मेक इन इंडिया' पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा बजट में पिछले 10 साल में जबरदस्त उछाल आया है। 2013-14 में भारत का रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था जो अब 2025-26 में बढ़कर 6.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

2024-25 में रिकॉर्ड डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट
रक्षा मंत्रालय ने 2024-25 में रिकॉर्ड 193 सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनका कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 2,09,050 करोड़ रुपये से अधिक है, जो पिछले उच्चतम आंकड़े से लगभग दोगुना है। इनमें से 92 प्रतिशत अर्थात 177 कॉन्ट्रैक्ट घरेलू रक्षा उद्योग को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 1,68,922 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 81 प्रतिशत है। स्वदेशी विनिर्माण पर यह महत्वपूर्ण ध्यान रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और पूरे क्षेत्र में रोजगार सृजन के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

डिफेंस एक्सपोर्ट में आया जबरदस्त तेजी
रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक में 30 गुना वृद्धि दिखाता है।
रक्षा निर्यात में 21 गुना बढ़ोतरी हुई है, जो 2004-14 के दशक में 4,312 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014-24 के दशक में 88,319 करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा निर्यात में साल-दर-साल 32.5% की तेजी आई है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 15,920 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये हो गया है।

भारत के विविध निर्यात पोर्टफोलियो में बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर (डीओ-228) विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तीव्र गति की इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो शामिल हैं। भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है, जिसमें 2023-24 में अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया शीर्ष खरीदार के रूप में उभरे हैं। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन में उछाल
भारत ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान वैल्यू के संदर्भ में स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल की है। सभी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा उत्पाद बनाने वाली अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, रक्षा उत्पादन का मूल्य बढ़कर 1,27,434 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174% की प्रभावशाली बढ़ोतरी को दर्शाता है।

कितनी डिफेंस परियोजनाएं की गई हैं शुरु?
मेक पहल के तहत भारत में 24 मार्च 2025 तक कुल 145 परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें 171 उद्योगों की भागीदारी है, जो स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं।
इस पहल में 40 मेक-I परियोजनाएं (सरकार द्वारा वित्तपोषित), 101 मेक-II परियोजनाएं (रक्षा उद्योग द्वारा वित्तपोषित) और 4 मेक-III परियोजनाएं (टीओटी के माध्यम से विनिर्माण) शामिल हैं, जो रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं।

रक्षा क्षेत्र में शुरु की गई परियोजनाओं की लिस्ट (Image: Ministry Of Defense )
डिफेंस प्रोडक्शन में भारत का लक्ष्य
देश में अब 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर बनाए जाते हैं, जो पहले 65-70% तक आयात किया जाता था। यह पहल रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
डिफेंस मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों पर नज़र डालें तो एक सशक्त रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल हैं, जो स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं। प्राइवेट कंपनियां भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जो कुल रक्षा उत्पादन में 21% का योगदान देती हैं और इनोवेशन और एफिशिएंसी (Efficiency) को बढ़ावा दे रही हैं।
भारत ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जिससे वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत होगी।
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