India Russia Trade: भारत (India) के रूस से होने वाले आयात (Import) में भारी गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल जहां भारत ने रूस से $4.81 अरब का सामान मंगाया था, वहीं इस साल जनवरी में यह घटकर सिर्फ 2.86 अरब डॉलर रह गया। कुल गिरावट करीब 40.5% दर्ज की गई है। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ नया व्यापार समझौता (Trade Deal) बताया जा रहा है। खासकर कच्चे तेल की खरीद में यह कमी स्पष्ट नजर आई है, क्योंकि रूस से भारत के कुल तेल आयात में 35% से ज्यादा हिस्सेदारी रही थी।

पिछले तीन सालों में भारत (India) ने रूस से भारी छूट पर तेल खरीदा था, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी क्रूड ऑयल (Crude Oil) पर काफी निर्भरता बना ली थी। लेकिन अब जनवरी के आंकड़े बताते हैं कि भारत की रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद धीमी कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब खरीद के फैसले सिर्फ कीमत या छूट पर नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं।
अमेरिका ने कम किया था टैरिफ-
इस गिरावट के पीछे अमेरिका (America) के साथ हुए नए व्यापार समझौते (Trade Deal) को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर लगने वाले टैक्स को घटाकर 18% कर दिया है और 25% अतिरिक्त शुल्क भी हटा लिया है, जो भारत की ओर से रूसी तेल खरीदने के विरोध में लगाए गए थे। बदले में भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा और तकनीक का आयात बढ़ाएगा। दोनों देशों का लक्ष्य है कि आपसी व्यापार $500 अरब डॉलर तक पहुंचे।
अभी और घट सकता है आयात-
बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Ind) जैसे बड़े निजी रिफाइनरी ने भी जनवरी में घोषणा की कि उन्हें रूसी तेल की कोई डिलीवरी नहीं मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में रूस से आयात और तेजी से घट सकता है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरी अब वेनेजुएला से सस्ता क्रूड ऑयल खरीदने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका भी चाहता है कि भारत वनेजुएला से ऊर्जा खरीदना फिर से शुरू करे।
वेनेजुएला से $14.1 अरब का क्रूड आयात-
इतिहास में देखें तो भारत ने 2012-13 में वेनेजुएला से 14.1 अरब डॉलर का क्रूड आयात किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह शून्य तक आ गया। वहीं रूस से क्रूड आयात 2011-12 में शून्य था, लेकिन 2022-23 में अचानक बढ़कर 31 अरब डॉलर पार कर गया और अगले साल 46.49 अरब डॉलर और 2024-25 में 50.28 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरी-
कुल मिलाकर, जनवरी 2026 का आंकड़ा यह दिखाता है कि भारत की विदेश व्यापार रणनीति अब सिर्फ कीमत पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर आधारित हो रही है। रूस से तेल आयात घटा है, अमेरिका और वनेजुएला से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिससे भारत की ग्लोबल ट्रेड पोजिशन और व्यापार संतुलन मजबूत हो सकता है।
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