India Growth Rate; GDP: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029 में हासिल कर पाएगा, जो पहले के अनुमान से एक साल अधिक है। इस देरी की मुख्य वजह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना बताया गया है।
IMF के आकलन के मुताबिक, भारत वित्त वर्ष 2026 तक 4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छू लेगा। हालांकि, वित्त वर्ष 2028 में GDP 4.96 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जिससे 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने में थोड़ी कमी रह जाएगी। इससे पहले फरवरी 2025 में IMF ने वित्त वर्ष 2028 के लिए 5.15 ट्रिलियन डॉलर का अनुमान लगाया था, जो अब लगभग 200 अरब डॉलर कम हो गया है।

2023 में IMF ने वित्त वर्ष 2028 के लिए 5.96 ट्रिलियन डॉलर GDP का अनुमान लगाया था, जिससे मौजूदा अनुमान में लगभग 0.5 ट्रिलियन डॉलर की बड़ी गिरावट दिखती है। इस अंतर का प्रमुख कारण एक्सचेंज-रेट का बढ़ना बताया जा रहा है।
रुपये में गिरावट से GDP ग्रोथ पर पड़ेगा असर
IMF का कहना है कि रुपये की कमजोरी भारतीय GDP पर सबसे अधिक असर डाल रही है। IMF का अनुमान है कि रुपया वित्त वर्ष 2026 में 87 रुपये प्रति डॉलर और वित्त वर्ष 2027 में 87.7 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हो सकता है।
यदि रुपया IMF के अनुमान से भी ज्यादा कमजोर होता है, तो भारत की डॉलर-GDP और घट सकती है। 21 नवंबर को रुपया 89.49 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, और 26 नवंबर को 89.23 रुपये पर बंद हुआ।
नॉमिनल GDP ग्रोथ रेट घटने का अनुमान
नॉमिनल GDP ग्रोथ के अनुमानों में भी IMF ने कटौती की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल GDP की वृद्धि दर 8.5% रहने की उम्मीद है, जो 2024 के 11% के अनुमान से कम है। वित्त वर्ष 2027 में यह दर 10.1% रह सकती है।
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत की नॉमिनल GDP (8.8%) रियल GDP (7.8%) से मामूली रूप से तेज़ रही। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कम महंगाई दर के चलते यह अंतर और भी घट सकता है।
सबसे तेज गति से बढ़ेगा भारत की अर्थव्यवस्था
लक्ष्य में देरी के बावजूद, IMF ने कहा है कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में शामिल रहेगा। मजबूत घरेलू मांग और जारी आर्थिक सुधार देश की विकास गति को बढ़ावा देंगे। रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार समझौते और सुधार भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को और मजबूत कर सकते हैं।
दूसरी ओर, भारतीय अधिकारियों ने IMF के कुछ अनुमानों पर आपत्ति जताई है। भारत ने IMF के उस अनुमान को 'रूढ़िवादी' बताया है जिसमें यह कहा गया था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ बने रहेंगे। भले ही भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य एक साल आगे खिसक गया हो, लेकिन IMF को भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और दीर्घकालिक विकास क्षमता पर पूरा भरोसा है।


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