अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब महायुद्ध की आशंका तक पहुंच गया है। इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के फेल होने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की भारी किल्लत, कीमतों में तेज़ी और सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 40 दिनों में जो तनाव बढ़ा है, वह अब और बिगड़ सकता है। हालांकि इस संकट के बीच चीन को आपदा में अवसर मिल सकता है, क्योंकि तेल-गैस संकट बढ़ने पर दुनिया पेट्रोल-डीजल से हटकर इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और सोलर जैसी तकनीकों की ओर तेजी से शिफ्ट कर सकती है, जिन क्षेत्रों में चीन पहले से ही मजबूत पकड़ रखता है।
लगातार बढ़ रही है तेल की कीमतें-
होर्मुज स्ट्रेट से आने वाला ज्यादातर तेल और गैस एशिया को सप्लाई होता है, लेकिन अब इस मार्ग पर गंभीर बाधा की स्थिति बन गई है। भारत समेत सभी एशियाई देश अपने घटते ऊर्जा भंडारों को मजबूत करने और वैकल्पिक स्रोत तलाशने की होड़ में जुट गए हैं। जैसे-जैसे हालात बिगड़ रहे हैं, अमेरिका और यूरोप समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
चीन को मिल सकता है फायदा-
तेल की कीमतें बढ़ने का सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ रहा है। वहीं चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन इस संकट से रणनीतिक फायदा उठा सकता है क्योंकि वह पहले से ही बैटरी, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल के उत्पादन और निर्यात में दुनिया में अग्रणी है, और ऊर्जा संकट बढ़ने पर इन ग्रीन टेक्नोलॉजी की मांग और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
BYD और CATL को हो सकता है फायदा-
इलेक्ट्रिकल व्हीकल बनाने वाली चीनी कंपनी BYD और बैटरी बनाने वाली CATL को इस जंग से फायदा हो सकता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, दुनिया की 70% इलेक्ट्रिक व्हीकल चीन में बनते हैं। लगभग 85% बैटरी सेल का प्रोडक्शन करता है। तेल-गैस की संकट बढ़ने से लोग पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर शिफ्ट होंगे जिससे बैटरी और चार्जिंग टेक की जरूरत तेजी से बढ़ेगी और इसका फायदा चीन को मिलेगा।
दुनिया के बाजारों में मजबूत पकड़-
कुछ साल पहले ही चीनी ऑटो कंपनियों ने इलेक्ट्रिक कारों का न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया, बल्कि एक्सपोर्ट भी बढ़ा रहे थे। चीनी कंपनियों ने अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों की तुलना में सस्ते मॉडल लॉन्च किए और दुनिया के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की। अब इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]
More From GoodReturns

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

आज खुले 3 बड़े IPO: Indo-MIM, Xtranet और Lohia Corp में निवेश का मौका, जानें क्या है सही रणनीति

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

मुंबई बारिश अलर्ट: बैंकिंग ठप होने पर पैसे की किल्लत से कैसे बचें? जानें स्मार्ट तरीके

LIC AGM 2026: डिविडेंड और बोनस पर बड़ा फैसला, निवेशकों के लिए क्या है खास?

Donald Trump की रणनीति से क्यों डरा Share Market? पढ़िए Sharad Kohli का Analysis

Vi का नाइट अनलिमिटेड डेटा: क्या आपके रिचार्ज में फ्री डेटा मिल रहा है? रिचार्ज से पहले ये जरूर देखें

30 से 180 दिनों के लिए निवेश: लिक्विड फंड्स, आर्बिट्राज या FD—कहां मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न?

Indo-MIM IPO: लिस्टिंग गेन का लालच या SIP की लंबी रेस? निवेश से पहले ये जरूर पढ़ें



Click it and Unblock the Notifications