हरियाणा का 2026-27 का बजट, जो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रस्तुत किया गया, 2,23,658.17 करोड़ रुपये आवंटित करता है और कृषि, शिक्षा, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देता है, जिसमें जलवायु और जल पहल के लिए वित्तीय अनुशासन और विश्व बैंक का समर्थन शामिल है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार (2 मार्च, 2026) को हरियाणा विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री के रूप में यह उनका दूसरा बजट था। सीएम सैनी ने 2,23,658.17 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित करते हुए महिलाओं, किसानों और छात्रों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।

इसके साथ ही राज्य के समग्र और संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए कृषि, शिक्षा, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़ी नई योजनाओं का भी ऐलान किया। वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
* बजट पूर्व परामर्श से प्राप्त 5000 सुझावों को बजट प्रस्ताव में शामिल किया गया।
* राज्य सरकार के कुल राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत केंद्रीय करों से मिलने वाला हिस्सा है।
* 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार वर्ष 2026 से 2031 तक हरियाणा का केंद्रीय करों में हिस्सा 1.361% रहेगा।
* विश्व बैंक के बोर्ड ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए 'हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट' को स्वीकृति दी।
* वर्ष 2031 तक सभी जिलों में लागू होने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक द्वारा 2716 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।
* अक्टूबर 2026 तक 'Water Secure Haryana' प्रोजेक्ट के लिए 5715 करोड़ रुपये तथा हरियाणा AI मिशन के लिए 474 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी विश्व बैंक से मिलेगी।
* वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा GDP का 2.66% रहने का अनुमान, जिसे वर्ष 2026-27 में घटाकर 2.65% तक सीमित रखने का प्रस्ताव।
* वर्ष 2025-26 के लिए कुल बजट 2,50,017 करोड़ रुपये रखा गया, जिसमें 31 मार्च 2026 तक लगभग 2,20,000 करोड़ रुपये व्यय अनुमानित।
* वर्ष 2026-27 के लिए कुल 2,23,658.17 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित।
* बजट में 4293.17 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा (GDP का 2.65%), राजस्व घाटा 0.87%, प्रभावित राजस्व घाटा 0.41%, पूंजीगत व्यय 1.86% और प्रभावी पूंजीगत व्यय 2.32% प्रस्तावित।
ग्रामीण और कृषि क्षेत्र
* वर्ष 2026-27 से ग्राम सभा की प्रत्येक बैठक में 6 नए कार्यों पर चर्चा अनिवार्य करने का प्रस्ताव।
* 300 घाटे में चल रही पैक्स को लाभ में लाने का लक्ष्य।
* श्रम एवं निर्माण सहकारी समितियों को 4000 करोड़ रुपये के सरकारी कार्य आवंटित करने का प्रस्ताव।
* 1,40,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि को खेती योग्य बनाने की योजना।
* धान छोड़कर दालें, तिलहन व कपास उगाने वाले किसानों को 2000 रुपये प्रति एकड़ बोनस।
* गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत प्रोत्साहन राशि 3000 से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति एकड़।
* ग्रामीण हाट मंडियों की स्थापना।
* मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति एकड़।
* हिसार में 30 करोड़ रुपये की लागत से हरियाणा पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र की स्थापना।
* 2000 नए विटा बूथ एवं मिल्क बार खोलने का प्रस्ताव।
उद्योग और रोजगार
* ब्लॉक आधारित लोकेशन वर्गीकरण व्यवस्था समाप्त कर सभी ब्लॉकों में औद्योगिक निवेश हेतु प्रोत्साहन।
* 'सक्षम' नाम से 500 करोड़ रुपये का विशेष फंड स्थापित करने का प्रस्ताव।
* वर्ष 2026-27 में न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी।
* उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का बजट 1950.92 करोड़ रुपये।
* श्रम विभाग का बजट 91.80 करोड़ रुपये।
* विभाग के लिए 77,950 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य।
प्रमुख विभागों को कितना मिला बजट?
* सिंचाई विभाग: 6446.57 करोड़ रुपये। पब्लिक हेल्थ: 5912.02 करोड़ रुपये। मौलिक शिक्षा: 10855.48 करोड़ रुपये। सेकेंडरी शिक्षा: 7862.41 करोड़ रुपये। उच्च शिक्षा: 4197.38 करोड़ रुपये।
* स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सहित संबंधित विभागों के लिए 14,007.29 करोड़ रुपये (पिछले वर्ष से 32.89% अधिक)
* खेल, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता: 2200.63 करोड़ रुपये।
* ऊर्जा विभाग: 6868 करोड़ रुपये।
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* लोक निर्माण विभाग: 5893.66 करोड़ रुपये।
* पंचायती राज व ग्रामीण विकास: 8703.75 करोड़ रुपये।
* शहरी स्थानीय निकाय: 6240.97 करोड़ रुपये।
* गृह विभाग: 8475.01 करोड़ रुपये।
* राजस्व विभाग के लिए 19,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य (17.8% अधिक)।
* महिला एवं बाल विकास: 2263.29 करोड़ रुपये।
* सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण: 178.14 करोड़ रुपये।
* नागरिक संसाधन सूचना विभाग: 422.78 करोड़ रुपये।
सामाजिक सुरक्षा
कर्मचारी और पेंशनधारियों के आश्रितों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु आय सीमा 3500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव। यह बजट विकास, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक सरोकारों के संतुलन का प्रयास है, जिसमें कृषि से लेकर उद्योग, शिक्षा से स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से शहरी बुनियादी ढांचे तक सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।


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