Gold Silver Price Prediction: सोने और चांदी की कीमतों में पिछले एक महीने से उतार-चढ़ाव और दबाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या सोना-चांदी खरीदने का यह सही समय है या कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है? वहीं, कॉपर भी निवेशकों के लिए एक नए अवसर के रूप में उभर रहा है। Commodity Catch में कमोडिटी एक्सपर्ट मुकेश ट्रेलर ने सोना, चांदी और कॉपर के आउटलुक, अहम सपोर्ट लेवल और ट्रेडिंग रणनीति पर अपनी राय दी।

Gold Price: ₹1.40 लाख तक गिर सकता है सोना?
कमोडिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में फिलहाल तेज रैली के बजाय ऊंचे स्तरों पर कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती, US Treasury Yield में बढ़ोतरी और फिजिकल डिमांड में कमजोरी से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। एक्सपर्ट ने बताया कि सोने के लिए ₹1,45,900 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर कीमतें इस स्तर से नीचे फिसलती हैं, तो आगे ₹1,43,000 और ₹1,41,000 के स्तर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि गिरावट के बाद सोने में रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है। लंबे समय के निवेशकों के लिए ₹1,44,000 से ₹1,40,000 का दायरा खरीदारी के संभावित अवसर के रूप में देखा जा सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार, ₹1,43,000 के आसपास का स्तर पहले भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इसलिए निवेशकों को गिरावट के दौरान बाजार की चाल और सपोर्ट लेवल पर नजर रखनी चाहिए।
Gold Trading Strategy: ₹1.51 लाख के ऊपर तेजी
ट्रेडर्स के लिए एक्सपर्ट ने सोने में ₹1,49,500 के स्तर को अहम बताया। उनके मुताबिक, जब तक सोना इस स्तर के नीचे रहता है, तब तक इसमें गिरावट की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। नीचे की तरफ ₹1,47,000, ₹1,46,000, ₹1,45,000 और ₹1,44,000 के स्तर अहम रहेंगे। वहीं, ₹1,50,000 के ऊपर मजबूती दिखने पर बाजार की चाल पर दोबारा नजर रखनी चाहिए। ₹1,51,000 के ऊपर तेजी की बेहतर पुष्टि मिल सकती है। ये स्तर इंटरव्यू में बताए गए एक्सपर्ट के तकनीकी अनुमान हैं। वास्तविक ट्रेडिंग से पहले मौजूदा भाव और बाजार की स्थिति की जांच जरूरी है।
Silver Price Outlook: चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा कमजोरी देखने को मिली है। इंटरव्यू में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के अंत में MCX पर चांदी करीब ₹2.32 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी, जबकि बातचीत के समय इसका भाव करीब ₹2.19 लाख प्रति किलो के दायरे में था। एक्सपर्ट के मुताबिक, चांदी में फिलहाल ज्यादा वोलैटिलिटी है। इसलिए ट्रेडर्स को इसमें पोजिशन लेने से पहले बाजार की दिशा और सपोर्ट लेवल को समझना चाहिए। उनका कहना है कि जिन ट्रेडर्स को अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव पसंद है, वे सोने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, ज्यादा वोलैटिलिटी के साथ ट्रेड करने वाले चांदी में अवसर तलाश सकते हैं। हालांकि, ज्यादा उतार-चढ़ाव में नुकसान का जोखिम भी बढ़ जाता है।
US Fed Rate Hike और CPI Data पर नजर
सोने और चांदी की अगली चाल के लिए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और Federal Reserve की ब्याज दर नीति महत्वपूर्ण रहेंगे। एक्सपर्ट के मुताबिक, CPI और PPI के आंकड़े बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। अगर महंगाई में नरमी आती है, तो सोने और चांदी को अस्थायी सपोर्ट मिल सकता है। इसके उलट, महंगाई ऊंची रहने और ब्याज दरों में सख्ती के संकेत मिलने पर इन धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि निवेशकों को केवल ब्याज दरों के फैसले पर ही नहीं, बल्कि Federal Reserve की आगे की रणनीति और अधिकारियों की टिप्पणियों पर भी ध्यान देना चाहिए।
Copper Price Prediction: ₹1,500 तक जा सकता है भाव
सोने और चांदी के अलावा कॉपर भी निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। एक्सपर्ट ने कॉपर को 'नया गोल्ड' कहने के बजाय 'नया सिल्वर' कहना बेहतर बताया। उनके मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बिजली ट्रांसमिशन और अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरणों में कॉपर की मांग बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी इसकी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ट्रेडिंग के लिहाज से एक्सपर्ट ने ₹1,430 के स्तर को कॉपर के लिए अहम ब्रेकआउट लेवल बताया। इसके ऊपर मजबूती आने पर ₹1,440, ₹1,460 और ₹1,490 के स्तर देखे जा सकते हैं। उनका अगला संभावित लक्ष्य ₹1,500 है। वहीं, गिरावट की स्थिति में ₹1,410 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है। इसके बाद ₹1,395 और ₹1,360 के स्तर अहम रहेंगे।
Gold ETF में निवेश बढ़ा, क्या यह सही समय है?
इंटरव्यू में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में Gold ETF में करीब ₹4,450 करोड़ का निवेश आया, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा लगभग ₹2,596 करोड़ था। यानी सितंबर में गोल्ड ETF का निवेश प्रवाह काफी बढ़ा। एक्सपर्ट के अनुसार, लंबे समय के निवेशक कीमतों में गिरावट के दौरान निवेश के अवसर तलाश सकते हैं। हालांकि, केवल ETF में बढ़ते निवेश को देखकर जल्दबाजी में पैसा लगाना उचित नहीं है।
Gold ETF के जरिए निवेशकों को सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव का फायदा लेने का अवसर मिलता है, जबकि फिजिकल गोल्ड में स्टोरेज और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना पड़ता है। ज्वेलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज भी लग सकता है। निवेश का तरीका चुनते समय अपने लक्ष्य, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और कुल पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट की राय में, सोने और चांदी में लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय चरणबद्ध निवेश और अहम सपोर्ट लेवल पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर, ट्रेडर्स को स्पष्ट ब्रेकआउट या बाजार की दिशा की पुष्टि के बाद ही रणनीति बनानी चाहिए।
कॉपर में AI, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बिजली से जुड़ी मांग लंबी अवधि में अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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