Gold Silver Crash: सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अब खरीदारी का सही मौका है या कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है? बाजार विशेषज्ञ रेनिशा के मुताबिक, मौजूदा स्तरों पर गोल्ड और सिल्वर में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकता है। उनका अनुमान है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो अगले 2-3 महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में 10-15 फीसदी तक की तेजी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, कीमतों की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी।
Gold Silver Price: गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?
रेनिशा के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों पर इस साल मुख्य रूप से तीन कारकों का दबाव देखने को मिला है। इनमें अमेरिका में महंगाई, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा सकती है। इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका पैदा होती है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ सकता है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव भी बुलियन मार्केट को प्रभावित करता है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है, तो सोने और चांदी की कीमतों को दोबारा मजबूती मिल सकती है।
Gold Price Target: सोना कहां तक जा सकता है?
इंटरव्यू में एक्सपर्ट ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। उनके मुताबिक, अगर कीमतें इस स्तर के आसपास टिकती हैं, तो बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। अगले छह महीनों के लिए उनका अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस टारगेट 4,900 से 5,000 डॉलर प्रति औंस है। हालांकि, यह लक्ष्य अमेरिका-ईरान तनाव की अवधि और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोना 4,200-4,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकता है, तो इसे तेजी की वापसी का संकेत माना जा सकता है। वहीं, अगर कीमतें 4,000 डॉलर के नीचे फिसलती हैं, तो निवेशकों को आगे की गिरावट के जोखिम के लिए तैयार रहना चाहिए।
Silver Price Prediction: चांदी में कितनी तेजी संभव?
चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी की उम्मीद जताई गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50-55 डॉलर प्रति औंस का स्तर चांदी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। उनके अनुसार, अगर चांदी 62-63 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकती है, तो तेजी की वापसी का संकेत मिल सकता है। इसके बाद कीमतें 70 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। अगले साल के लिए उन्होंने 80 डॉलर प्रति औंस का स्तर भी संभावित लक्ष्य के रूप में बताया। भारतीय बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.10 लाख रुपये का दायरा एक्सपर्ट के मुताबिक खरीदारी को धीरे-धीरे बढ़ाने का जोन हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये की विनिमय दर भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है।
Dhanteras पर Gold Silver खरीदें या इंतजार करें?
धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक्सपर्ट ने चरणबद्ध खरीदारी की रणनीति बताई है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्तरों पर निवेश करने वाले लोग अपनी पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय खरीदारी को दो हिस्सों में बांट सकते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि निवेशक अपनी प्रस्तावित रकम का 50 फीसदी मौजूदा स्तरों पर और बाकी 50 फीसदी धनतेरस या दिवाली के आसपास निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उन्होंने साल भर नियमित अंतराल पर छोटी रकम निवेश करने की रणनीति का भी समर्थन किया। इससे किसी एक कीमत पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह रणनीति हर निवेशक के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।
Gold vs Silver: पोर्टफोलियो में किसे कितनी जगह दें?
एक्सपर्ट ने सोने और चांदी के बीच निवेश का अनुपात 70:30 रखने का सुझाव दिया। उनके मुताबिक, अगर कोई निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 20-25 फीसदी हिस्सा कीमती धातुओं में लगाने का फैसला करता है, तो उसमें सोने का हिस्सा अधिक और चांदी का हिस्सा अपेक्षाकृत कम रखा जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 72 के आसपास है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। इस अनुपात में बदलाव से निवेशकों को दोनों धातुओं के तुलनात्मक मूल्य का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
ट्रेडर्स के लिए क्या है सलाह?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और अन्य वैश्विक घटनाओं के बीच एक्सपर्ट ने ट्रेडर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले माहौल में बड़ी पोजीशन लेकर चलने से जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने एक ट्रेड में कुल पोर्टफोलियो का 1 फीसदी से ज्यादा जोखिम नहीं लेने, फ्यूचर्स और ऑप्शंस में बिना हेजिंग के पोजीशन से बचने और जरूरत के मुताबिक पोजीशन का आकार घटाने की सलाह दी।
कुल मिलाकर, सोने और चांदी में गिरावट के बाद रिकवरी की संभावना जरूर है, लेकिन तेजी की गारंटी नहीं है। निवेशकों को किसी भी प्राइस टारगेट को निश्चित भविष्यवाणी मानने के बजाय वैश्विक संकेतों और अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लेना चाहिए।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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