Budget 2026-27: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। ऐसे में इस वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा पर पूरे देश की निगाहें अभी से ही टिकी हैं, क्योंकि यह हर नागरिक की जेब, रसोई से लेकर दैनिक जीवनचर्या के कामकाज पर सीधा असर डालता है।
हालांकि, इस बार वित्त मंत्री अंतरिम बजट नहीं बल्कि पूर्ण या आम बजट पेश करेंगी। आखिर इस बार पूर्ण बजट ही क्यों पेश किया जा रहा है, यह समझना महत्वपूर्ण है। इसके साथ यह भी जानते हैं कि अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में क्या अंतर है? अक्सर लोगों के मन में अंतरिम बजट और पूर्ण बजट के अंतर को लेकर सवाल रहते हैं.. तो आइए इसे समझते हैं।
इस बार अंतरिम बजट क्यों पेश नहीं होगा?
चूंकि 2024 में आम चुनाव यानी लोकसभा के चुनाव थे। ऐसे में नई सरकार के गठन से पहले के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जो फंड की आवश्यकता थी उसके अनुसार ही बजट पेश किया गया था, जिसे अंतरिम बजट कहा जाता है। यानी यह कुछ अवधि के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब सरकार बनने के बाद कार्यकाल सुचारू रूप से चल रहा है, इसलिए 2026 में 'पूर्ण बजट' लाया जाएगा।

नियम के अनुसार, अंतरिम बजट तब आता है जब लोकसभा चुनाव निकट हों और सरकार का कार्यकाल समाप्त हो रहा हो, जैसा कि 2024 में आम चुनाव से पहले देखा गया था। लेकिन, अब कोई आम चुनाव नजदीक नहीं होने के कारण, 1 फरवरी को पूर्ण बजट पेश होगा। इसमें सरकार 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आय और व्यय का विस्तृत रोडमैप देश के सामने रखेगी। इसी बजट में बड़े नीतिगत फैसले भी लिए जाते हैं।
अंतरिम बजट और आम बजट में क्या अंतर है?
अंतरिम बजट का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 116 में है। यह एक अस्थाई वित्तीय व्यवस्था है, जो तब लाई जाती है जब मौजूदा सरकार के पास पूर्ण बजट पेश करने का पर्याप्त समय नहीं होता - अक्सर आम चुनाव से पहले ऐसा किया जाता है। इसमें सरकार अगली सरकार बनने तक के कुछ महीनों के खर्चों के लिए संसद से मंजूरी मांगती है। आमतौर पर, इसमें कोई बड़ी नीतिगत घोषणाएं या नए कर शामिल नहीं होते, क्योंकि ऐसे फैसले नई सरकार पर छोड़ दिए जाते हैं। इसे 'मिनी बजट' भी कहा जाता है।
वहीं, पूर्ण बजट को ही आम बजट कहा जाता है, जिसका वर्णन संविधान के अनुच्छेद 112 में 'वार्षिक वित्तीय विवरण' के तहत किया गया है। इसमें सरकार पूरे एक वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करती है। इस बजट का मुख्य उद्देश्य राजकोषीय घाटे को कम करना, विकास दर बढ़ाना, महंगाई पर नियंत्रण रखना और अर्थव्यवस्था को दिशा देना होता है। आम बजट में ही सरकार कर स्लैब में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेती है।
'वोट ऑन अकाउंट' और अंतरिम बजट में फर्क है या दोनों एक ही है?
कई बार लोग 'वोट ऑन अकाउंट' (लेखानुदान) और अंतरिम बजट को एक ही मान लेते हैं, पर इनमें अहम फर्क है। वोट ऑन अकाउंट भी संविधान के अनुच्छेद 116 के तहत आता है। सरकार इसे तब लाती है जब उसे पूरे वर्ष के बजाय कुछ महीनों के लिए केवल खर्चों (जैसे कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, और सरकारी योजनाओं का व्यय) को चलाने हेतु संसद से धन की मंजूरी चाहिए होती है। अंतरिम बजट जहां आय और व्यय दोनों का ब्यौरा देता है, वहीं वोट ऑन अकाउंट का संबंध केवल खर्चों के लिए अनुमति प्राप्त करने से है।
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