नई दिल्ली, जून 3। अगर पूछा जाए कि सारी जिंदगी नौकरी से गुजारा किया जा सकता है तो हो सकता है कि बहुत कम लोग ही इसका जवाब हां में दें। बहुत से लोग नौकरी करते हुए बिजनेस के आइडिया तलाश करते हैं, मगर कामयाबी सभी को नहीं मिलती है। असल में बिजनेस आइडिया के साथ आपके पास और भी बहुत कुछ होना चाहिए। आपको रिसर्च भी करनी होगी कि जिस चीज का बिजनेस आप करने की सोच रहे हैं उसमें कामयाबी मिलेगी भी या नहीं। अगर कामयाबी की उम्मीद हो तो आप बहुत छोटे प्रोडक्ट से भी करोड़ों रु कमा सकते हैं। जैसा कि 5-10 रु वाले स्नैक्स आइटम बेचने वाली कंपनी के मालिक प्रभु गांधीकुमार कमा रहे हैं।
5 साल के अंदर करोड़ों में पहुंचा कारोबार
प्रभु ने टीएबीपी स्नैक्स एंड बेवरेजेज की स्थापना की। इसके लिए उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिल कर ऑन-फील्ड रिसर्च की। उनकी 5 साल पुरानी कंपनी, जिसका हेडक्वार्टर कोयंबटूर, तमिलनाडु में है, स्नैक्स और पेय उत्पाद बनाती है, जिनकी कीमत 5 रुपये और 10 रुपये होती है। असल में प्रभु की कंपनी का मकसद विशेष रूप से हाशिए पर मौजूद लोगों को अच्छा प्रोडक्ट मुहैया कराना है। पिछले साल उनकी कंपनी ने 35.5 करोड़ रुपये इनकम हासिल की। ये 2017 के बाद से कंपनी के बिजनेस में 350 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।
कई राज्यों में फैला कारोबार
टीएबीपी स्नैक्स एंड बेवरेजेज के आइटम कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना सहित कई राज्यों के लोकल स्टोर, पेट्रोल पंप और सुपरमार्केट में मिलते हैं। कंपनी ओडिशा में भी प्रवेश करने की तैयारी कर रही है। साथ ही यह जल्द ही महाराष्ट्र और गोवा में कारोबार शुरू करेगी। यानी सिर्फ 5 साल के अंदर करीब 10 राज्यों में प्रभु की कंपनी का बिजनेस फैल गया है।
कैसे मिली कामयाबी
द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार प्रभु बताते हैं कि यह समझना जरूरी है कि ग्राहक क्या चाहते हैं, यही कामयाबी का राज है। जब तक आपको सही बिजनेस मॉडल नहीं मिल जाता, तब तक आपको नुकसान का सामना करना पड़ता है। ये प्रोसेस महंगा और थकाऊ हो सकता है। प्रभु की कंपनी की पेय उत्पादन प्रोडक्शन क्षमता 1,200 बोतल प्रति मिनट है। यानी सालाना लगभग 2.4 करोड़ बोतल।
एफएमसीजी सेक्टर की तरफ रुझान
प्रभु एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वे उद्यमियों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन उन्होंने पारिवारिक बिजनेस संभालने से पहले, अनुभव के लिए एक रिटेल सलाहकार के रूप में एक निजी फर्म में काम किया। वह छह साल तक अमेरिका में भी रहे और 2012 में अपने पिता के साथ जुड़ गए। अपने काम से असंतुष्ट प्रभु ने एफएमसीजी इंडस्ट्री सहित कई क्षेत्रों को एक्सप्लोर करने का फैसला लिया।
200 करोड़ रु तक पहुंचाना है कारोबार
प्रभु की पत्नी वृंदा के अनुसार स्थानीय डिस्ट्रिब्यूटर के चलते लोग स्वतंत्र रूप से उत्पादों की आलोचना या प्रशंसा कर सकते हैं, जिससे कंपनी को जरूरी बदलावों को समझने में मदद मिलती है। इस समय कंपनी 700 वितरकों के साथ काम करती है और 1,19,000 दुकानों तक उत्पादों पहुंचाती है। अगले चार वर्षों में, पति-पत्नी की यह जोड़ी 5,00,000 दुकानों को कवर करने और 200 करोड़ रुपये तक इनकम जनरेट करने की उम्मीद कर रही है।
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