नयी दिल्ली, अप्रैल 12: खेती और बागबानी बहुत कमाई वाले बिजनेस हैं। बशर्ते ये कि आप किसी अनोखी या दुर्लभ चीज की खेती करें। जैसे कि महाराष्ट्र के एक किसान ने आम की 2 स्पेशल किस्में उगाईं और मालामाल हो गया। उनकी कमाई भी लाखों में है। उनके स्पेशल आम दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, बैंगलोर और रायपुर तक जाते हैं। उनकी उत्पादन क्षमता भी काफी बढ़ गयी है। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।
खुद को मानते हैं खुशकिस्मत
जिस किसान की हम बात कर रहे हैं वो हैं महाराष्ट्र के परमानंद गावने। परमानंद किसान होने पर खुद को खुशकिस्मत मानते हैं। उनका गाँव, बेलंकी, जो मिराज टाउन से 25 किमी दूर है, की सिर्फ दो एकड़ जमीन पर 15 टन आमों का उत्पादन होता है। प्रत्येक एकड़ में केसर आम की किस्म के 900 पौधे हैं। 62 वर्षीय परमानंद ने अल्ट्रा हाई-डेंसिटी प्लांटिंग (यूएचडीपी) सिस्टम को अपनाया है। दुनिया भर में आम के बागान के लिए इसी सिस्टम का उपयोग किया जाता है। इससे पारंपरिक तरीकों की तुलना में 200 फीसदी अधिक फसल होती है।
फ्लेवर और ताजा फल
यूएचडीपी सिस्टम से फलों का एक समान आकार और रंग रहता है। साथ ही इसका स्वाद और ताजगी भी बरकरार रहती है। 2015 में उनका उत्पादन प्रति एकड़ 3 टन था, जो उनकी पहली फसल थी। 2020 तक परमानंद का उत्पादन प्रति एकड़ 7.5 टन हो गया। परमानंद का मानना है कि बागों के उचित प्रबंधन से वह प्रति एकड़ 10 टन आम प्राप्त कर सकते हैं।
पहले उगाते थे अंगूर
परमानंद पहले अंगूर उगाते थे। वे जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं उसकी जानकारी दूसरे किसानों के साथ भी साझा करते हैं। हर महीने उनके पास करीब 50 किसान आते हैं। मई-जून में आमों के सीजन के समय उनके पास किसान बड़ी संख्या में आते हैं। पिछले साल कोरोना काल में भी उनके पास हजारों लोग आए। जिस तरह परमानंद पेड़ उगाते हैं उस तरीके में पेड़ों की नियमित छंटाई से उन्हें 7 फीट से अधिक नहीं बढ़ने दिया जाता। इससे आम के बाग 3 से 4 साल में अपनी फुल क्षमता प्राप्त कर लेते हैं, जबकि खेती के पारंपरिक तरीकों से 7 से 8 साल लगते हैं।
कितनी है कमाई
परमानंद प्रति एकड़ पर 100,000 रुपये के करीब खर्च करते है, जिसमें उर्वरक और मजदूरी शामिल है। इससे उन्हें 600,000 रुपये प्रति एकड़ का लाभ होता है। यूएचडीपी की प्रोसेस इजरायल और दक्षिण अफ्रीका में वर्षों से चलन में है और अब भारत में भी थोड़े से किसान इस प्रोसेस से खेती कर रहे हैं। इस तरीके में पानी की खपत 50 फीसदी तक कम हो जाती है।
कौन-कौन से आम हैं
परमानंद के पास केसर के अलावा अलफांसो और रुमानिया आम की कई वेरायटी हैं, जो कि उत्तरी आंध्र प्रदेश में उगता है। इस काम में उनके दो बेटे भी उनकी मदद करते हैं। सुपर यूएचडीपी के लाभों पर परमानंद कहते हैं ति यह उत्पादकता को 2-3 गुना तक बढ़ाती है, सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की जरूरत को 50 प्रतिशत तक कम करती है और पौधों द्वारा उर्वरक का सेवन बढ़ाती है।
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