बिल्डर : मजदूरों को दे रहे हवाई जहाज के टिकट का लालच, जानिए मामला

नयी दिल्ली। हैदराबाद में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में अपने घरों को लौटने में ढेरों मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। मगर उनमें से कई लोगों के लिए वापसी की राह काफी आसान हो गई है। दरअसल शहर के बिल्डर इन मजदूरों के लिए एसी ट्रेन और यहां तक कि हवाई जहाज तक के टिकट दे रहे हैं। कम वर्कफोर्स के चलते बिल्डर ये कदम उठाने को मजबूर हो गए हैं। बिल्डरों का उद्देश्य मजदूरों को टिकट देकर उन्हें हालात सामान्य होने पर वापस बुलाने के लिए ललचाना है। बिल्डर उम्मीद कर रहें हैं कि जहाजों और एसी ट्रेनों के टिकट से वे उन्हें लुभाने में कामयाब हो जाएंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें प्रति व्यक्ति 4000 से 5000 रु तक का खर्च उठाना पड़ रहा है।

 इन राज्यों के हैं मजदूर

इन राज्यों के हैं मजदूर

हैदराबाद में जिन मजदूरों को हवाई जहाज के जरिए अपने राज्यों में भेजा जा रहा है उनमें बढ़ई, चित्रकार और ग्रेनाइट श्रमिक आदि शामिल हैं। मुख्य तौर पर इनमें से अधिकतर लोग बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के हैं। इनकी पूरे शहर के मजदूरों की संख्या में 40 से 50 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी मजदूर यूपी, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के हैं। प्रेस्टीज ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट के अनुसार ये हताश करने वाला समय है और हमें श्रमिकों को शहर में वापस लाने के लिए निवेश करने की जरूरत है। किराया 5,000 रुपये से कम होने तक हमने अपने ठेकेदारों को फ्लाइट बुक करने के लिए कहा है।

एडवांस बांट रहे पैसा

एडवांस बांट रहे पैसा

कुछ लोग मजदूरों को लुभाने के लिए हवाई टिकट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो एसी ट्रेन टिकटों के साथ-साथ मजदूरों को कुछ पैसा एडवांस में दे रहे हैं। ट्रेन में एसी के टिकट की कीमत लगभग 1,800 से 2,000 रुपये प्रति सीट है। मगर प्रवासी श्रमिकों को फिर से बुलाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। कंपनियां मजदूरों के सफर के अलावा ऊपर 10000 रु तक का एडवांस दे रही हैं। ओम श्री बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के सीईओ के मुताबिक इस महीने हमने कम से कम 300 मजदूरों के लिए टिकट बुक किए हैं।

1.5 लाख मजदूर घरों को लौटे

1.5 लाख मजदूर घरों को लौटे

करीब 1.5 लाख प्रवासी मजदूर, जिनमें से अधिकतर रियल्टी सेक्टर में काम करते हैं, लॉकडाउन के बाद से अपने गृह राज्यों को लौट गए हैं। एक ठेकेदार, जिसके पास हैदराबाद में 2,500 श्रमिकों का सबसे बड़े लेबर कैम्पों में से एक, ने कहा कि कुछ निर्माण फर्म हैं जो ज्यादातर बिहार और बंगाल से श्रमिकों को लाने के लिए हवाई जहाज के विकल्प देख रही हैं। पूरे शहर में 10-15 फीसदी ही मजदूर रह गए हैं। इसीलिए कंपनियां और ठेकेदार उन्हें तरह तरह के बेनेफिट के जरिए वापस लाने क उपाय कर रही हैं।

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