नई दिल्ली, फरवरी 1। आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश किया। बजट में बजट 2022 से आयकर की छूट की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को कुछ भी नहीं दिया है। मतलब इनकम टैक्स के जो स्लैब पहले से लागू हैं, वहीं अगले साल भी लागू रहेंगे। मगर सरकारी कर्मचारियों को टैक्स के मामले में फायदा मिला है। ये फायदा राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा। राज्य सरकारों के कर्मचारी वित्त वर्ष 2022-23 से अपने नियोक्ता, यानी राज्य सरकार द्वारा किए गए एनपीएस योगदान पर 14 फीसदी के टैक्स बेनेफिट के लिए क्लेम कर सकेंगे।

केवल केंद्रीय कर्मचारियों को मिलता है ये फायदा
वर्तमान में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारी 14 फीसदी टैक्स बेनेफिट का क्लेम करने के पात्र हैं। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के मामले में कर्मचारी के एनपीएस खाते में नियोक्ता के योगदान पर टैक्स 10 फीसदी तक सीमित है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में निवेश आयकर अधिनियम, 1961 की तीन अलग-अलग धाराओं के तहत टैक्स बेनेफिट प्रदान करता है।
क्या-क्या हैं टैक्स बेनेफिट
किसी वित्तीय वर्ष में एनपीएस में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर धारा 80सीसीडी (1) के तहत कटौती का फायदा मिलता है। यह कटौती धारा 80सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की कुल सीमा के अंदर ही आती है। इसके अलावा एनपीएस धारा 80सी कटौती के अलावा अतिरिक्त कटौती की पेशकश करता है। यह अतिरिक्त कटौती धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत 50,000 रुपये तक उपलब्ध है। कोई करदाता एनपीएस के टियर I खाते में निवेश करके 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती के लिए क्लेम कर सकता है। इस तरह एक करदाता एनपीएस में निवेश करके किसी वित्तीय वर्ष में 2 लाख रुपये की कुल टैक्स छूट का फायदा ले सकता है।
कब लगता है टैक्स
2 लाख रुपये की सीमा से अधिक नियोक्ता (कंपनी) की तरफ से कोई भी योगदान भी अधिनियम की धारा 80सीसीडी (2) के तहत कटौती के लिए पात्र होती है। कर्मचारी के एनपीएस खाते में नियोक्ता का योगदान तब टैक्सेबल हो जाएगा यदि नियोक्ता का एनपीएस खाते, ईपीएफ और सेवानिवृत्ति (सुपरएन्युएशन) में योगदान किसी वित्तीय वर्ष में 7.5 लाख रुपये से अधिक हो।


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