Budget 2026: बड़े ऐलान की तैयारी में सरकार? छोटे फर्म्स को GST नियमों में मिल सकती है राहत!

Union Budget 2026; Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और वित्त मंत्रालय ने भी इस पर अपनी कवायद शुरू कर दी है। बजट की तैयारियों के बीच तमाम सेक्टर्स और तबके के लोग अपने-अपने स्तर पर मिलने वाली राहत को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।

छोटे कारोबारियों को GST नियम में मिलेगी राहत?

इस बीच देश के छोटे कारोबारियों को जीएसटी नियमों में राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसी संभावना है कि केंद्र सरकार छोटे कारोबारियों को जीएसटी (GST) के मोर्चे पर बड़ा तोहफा दे सकती है। सितंबर में जीएसटी स्लैब में कटौती के बाद, सरकार अब अगले वित्तीय वर्ष के केंद्रीय बजट में छोटे व्यवसायों के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कंप्लायंस के बोझ को कम करने पर कथित तौर पर विचार कर रही है।

Budget 2026

इस मामले से जुड़े दो व्यक्तियों ने नाम न छापने की शर्त पर मिंट ने अपनी एक खबर में बताया है कि माइक्रो-एंटरप्राइजेज को मौजूदा मासिक टैक्स पेमेंट के बजाय तिमाही जीएसटी भुगतान की अनुमति मिल सकती है। माइक्रो-एंटरप्राइजेज ऐसे व्यवसाय होते हैं जिनका सालाना टर्नओवर ₹10 करोड़ तक होता है। खबर के अनुसार, एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को गलत या देरी से फाइलिंग के मामले में सीधे दंडित करने से पहले चेतावनी दी जा सकती है।

वर्तमान में क्या हैं नियम?

वर्तमान में, सीजीएसटी अधिनियम की धारा 47 के तहत, GSTR-1, GSTR-3B या GSTR-9 दाखिल करने में देरी पर विलंब शुल्क लगता है, जो दैनिक आधार पर अधिकतम सीमा तक बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, बकाया जीएसटी राशि पर सालाना 18% की दर से ब्याज भी चुकाना होता है। भारत के 7.3 करोड़ MSMEs देश की जीडीपी में 30% और कुल निर्यात में 45% का योगदान करते हैं।

इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि टैक्स फाइल करने और टैक्स से जुड़े अन्य अनुपालनों में बहुत समय लगता है, जिसके लिए अक्सर अतिरिक्त मैनपावर की आवश्यकता होती है। उन्होंने इसे सीमित पूंजी और कार्यबल वाले माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए एक बड़ी परेशानी बताया, खासकर जब वे 50% के भारी अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हों। इस तरह की अनुपालन लागत कभी-कभी उनके टर्नओवर का 6-8% तक होती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीएसटी प्रणाली में एक 'कम्पोजिशन स्कीम' भी है, जो एक सरल और वैकल्पिक टैक्स अनुपालन प्रणाली है। इसमें टैक्स देनदारी और रिटर्न फाइलिंग की सीधी ज़रूरत नहीं होती। हालांकि, इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ न मिलने के कारण इसे अपनाने वाले व्यवसायों की संख्या काफी कम है।

अतः, प्रस्तावित छूटों पर निर्णय उनके 'कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस' पर आधारित होगा। इसमें देखा जाएगा कि इन बदलावों से कितने व्यवसायों को लाभ मिलेगा और राजस्व पर कितना न्यूनतम असर पड़ेगा।

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