Budget 2026: आगामी बजट को लेकर जहां एक ओर तैयारियां जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर तमाम लोग सरकार से अलग-अलग तरह के राहत मिलने की उम्मीदें लगाए हुए हैं। इन उम्मीदों के बीच सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को स्टैंटर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

फिनोवेट के CEO निहाल मोटा ने सैलरी पाने वालों, निवेशकों और सीनियर सिटीजन के लिए ज़्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन, होम लोन में राहत और टैक्स इंसेंटिव की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी, 2026 को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट में सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने पर विचार किया जा सकता है।
कई एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स का अनुमान है कि बढ़ती महंगाई और रहने की लागत को देखते हुए सरकार मानक कटौती को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर सकती है। अभी यह पुराने टैक्स सिस्टम के तहत 50,000 रुपये और नए टैक्स सिस्टम के तहत 75,000 रुपये है। ज़्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन से सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स को बढ़ती महंगाई को मैनेज करने में मदद मिलेगी।
मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स को मिलेगा फायदा?
वर्तमान स्थिति (वित्त वर्ष 2025-26) में नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत मानक कटौती 75,000 रुपये है। इसके कारण 12.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले वेतनभोगी व्यक्तियों को कोई कर नहीं देना पड़ता है। वहीं, पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत मानक कटौती अभी भी 50,000 रुपये है।
यदि स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाता है, तो मध्यम वर्ग के करदाताओं के पास खर्च योग्य आय में वृद्धि होगी और टैक्स फाइलिंग और भी सरल हो सकती है।


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