Union Budget 2026 Expectation: जैसे-जैसे केंद्रीय बजट की घोषणा का समय नज़दीक आता है, वित्तीय बाज़ारों में निवेशकों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगती हैं। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि निवेश पोर्टफोलियो पर केंद्रीय बजट का सीधा प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में कम हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से जुड़े कई बड़े फैसले बजट पेश होने से पहले ही ले लेती है, जिससे बजट में नई घोषणाओं के लिए बहुत सीमित गुंजाइश बचती है।

पिछले पांच वर्षों में, सरकारी पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) से जुड़ी उम्मीदों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सरकार लगातार राजकोषीय समेकन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति कर रही है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए कानूनों का सरलीकरण और बेहतर शासन जैसे कई प्रशासनिक सुधार बजट के दायरे से बाहर रहकर भी महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रहे हैं। इसके अतिरिक्त, कर नियमों को फिर से लिखा गया है और सिक्योरिटीज बाज़ार के कानूनों की समीक्षा प्रक्रिया भी जारी है।
केंद्र सरकार धीरे-धीरे देशव्यापी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों के विस्तार की ओर बढ़ रही है। हर वर्ष, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएँ इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और अन्य उभरते क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को गति दे रही हैं। शिक्षा से संबंधित बुनियादी ढाँचा भी सरकार की प्राथमिकताओं में लगातार बना हुआ है। दूसरी ओर, शहरी विकास की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, और इसके क्रियान्वयन चरणों में कुछ चुनौतियाँ और अव्यवस्था सामने आई हैं।
आगामी केंद्रीय बजट का प्राथमिक लक्ष्य अर्थव्यवस्था की गति तेज करना और समावेशिता को बढ़ावा देना है। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, डीप टेक और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए युग के उद्योगों में निवेश को बल मिलेगा। नागरिकों तक सार्वजनिक सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार ज़रूरी है। साथ ही, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। मध्यम वर्ग की अपेक्षाएँ पूरी करने के लिए उन्हें बेहतर उत्पादकता के माध्यम से सशक्त बनाना भी महत्वपूर्ण है।
सरकार की वित्तीय सेहत के लिए, बजट में वृद्धि पर ध्यान बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटा प्रबंधन को बेहतर बनाना ज़रूरी है। इसके लिए सरकारी पूंजीगत व्यय और विकास कल्याण पर खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। वित्त मंत्री के एजेंडे में निजी निवेश को बढ़ावा देना शामिल होगा, भले ही वह सीधे उनके दायरे में न आए। इसके बावजूद, उम्मीद है कि वे उन उद्योगों के लिए प्रोत्साहन का ऐलान करेंगी, जहाँ निवेश की सबसे अधिक आवश्यकता है।
पिछला साल करदाताओं के लिए दो मुख्य कारणों से अहम था: व्यक्तिगत कर नियमों में बदलाव से मध्यम वर्ग के हाथ में अधिक पैसे आए, और अप्रत्यक्ष करों में बड़ी कटौती की गई। मुद्रास्फीति घटने से क्रय शक्ति बढ़ी। मध्यम वर्ग का आत्मविश्वास बढ़ाने वाले उपाय हर साल ज़रूरी हैं, और इस बजट में कुछ नया करना होगा। डेट निवेश पर कैपिटल गेन्स नियमों को अन्य एसेट क्लास के समान करने से मध्यम वर्ग को राहत मिलने की संभावना है।
पिछले दो वर्षों से, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय बाज़ार में बिकवाली कर रहे हैं। निजी क्षेत्र की निवेश ज़रूरतों के लिए दीर्घकालिक व धैर्यपूर्ण निवेश को आकर्षित करने हेतु इस प्रवृत्ति को बदलना नितांत आवश्यक है। वेंचर कैपिटलिस्ट्स और प्राइवेट इक्विटी फर्मों ने भारत में अच्छा मुनाफ़ा अर्जित किया है। उन्हें देश में पुनर्निवेश करना चाहिए और खासकर डीप टेक में मौजूद शुरुआती अवसरों का लाभ उठाने में सक्रिय रूप से जुटना चाहिए।
केंद्रीय बजट 2026 का एक सकारात्मक पहलू यह है कि यह ऐसे समय में प्रस्तुत हो रहा है जब बाज़ार की उम्मीदें कम हैं। नीति-निर्माताओं को स्पष्ट रूप से पता है कि अर्थव्यवस्था के लिए क्या आवश्यक है। जब उम्मीदें नहीं होतीं या कम होती हैं, तो बजट आगे का रास्ता दिखाने में अधिक सक्षम होता है। इससे व्यापारिक विश्वास बढ़ता है, जो एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। यह बजट बिना किसी शोरगुल के, चुपचाप ही काफी कुछ प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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