Budget 2026 Expectation: बजट के पेश होने में अब कुछ घंटों का समय बचा है। उससे पहले तमाम सेक्टर्स और आम लोगों से लेकर खास लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इसी कड़ी में तमाम बड़ी कठिनाइयों और चुनौतियों से जूझ रहे टेलीकॉम सेक्टर को बजट से काफी उम्मीदें हैं।

देश के शीर्ष टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में बड़ी वित्तीय राहत की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन पर रेगुलेटरी लेवी और टैक्स का भारी बोझ 5G विस्तार और भविष्य के नेटवर्क अपग्रेड में निवेश की क्षमता को बाधित कर रहा है।
लाइसेंस फीस में कटौती की मांग
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने लाइसेंस फीस में भारी कटौती की मांग की है, जो वर्तमान में एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 3% है। इसे घटाकर 0.5%-1% किया जाना चाहिए, जिससे प्रशासनिक लागतें कवर हो सकें। ऑपरेटर्स AGR का 5% डिजिटल भारत निधि में भी देते हैं।
COAI के डायरेक्टर जनरल एस.पी. कोचर ने इस प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सुझाए गए उपाय सरकार के लिए 'रेवेन्यू न्यूट्रल' होंगे, यानी राजस्व प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा, "टेलीकॉम कंपनियों पर कैश-फ्लो का दबाव काफी कम होगा। अगर कानूनी पेमेंट्स में कमी आती है, तो उनके पास नेटवर्क को मजबूत करने, 5G रोलआउट में तेजी लाने और विकसित भारत विजन के साथ जुड़ी नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी में निवेश के लिए पूंजी बचेगी।"
इंडस्ट्री ने सरकार से डिजिटल भारत निधि में अतिरिक्त योगदान को तब तक रोकने की अपील की है, जब तक डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स इस्तेमाल न हुए मौजूदा फंड का पूरा उपयोग नहीं कर लेता। उनका तर्क है कि लगातार कलेक्शन से ऑपरेटर्स के फाइनेंस पर दबाव पड़ रहा है, जबकि सेक्टर को उस हिसाब से फायदा नहीं मिल रहा है।
टेलीकॉम सेक्टर को GST में सुधार की उम्मीद
GST सुधार, इंडस्ट्री की बजट विश लिस्ट का एक और मुख्य बिंदु है। COAI ने लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेस (SUC) और नीलामी वाले स्पेक्ट्रम भुगतानों को GST से छूट देने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, इसने इन भुगतानों पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत GST को मौजूदा 18% से घटाकर 5% करने का सुझाव दिया है।
COAI ने स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण और आवंटन ढांचे में भी व्यापक बदलाव की मांग की है। एसोसिएशन का तर्क है कि टेलीकॉम नेटवर्क आज विनिर्माण से लेकर स्वास्थ्य सेवा, फिनटेक और डिजिटल गवर्नेंस तक लगभग हर क्षेत्र के लिए एक मूलभूत संरचना का कार्य करते हैं। इसलिए, स्पेक्ट्रम नीति को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश सुनिश्चित करने के लिए सामर्थ्य (अफोर्डेबिलिटी) और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इंडस्ट्री का मानना है कि लेवी और GST का बोझ कम किए बिना, टेलीकॉम कंपनियां कवरेज बढ़ाने और सेवा गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक पूंजीगत खर्च बरकरार रखने में संघर्ष करेंगी।
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