Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, सबकी नजर उस दिन बजट के हर एक पहलू पर रहने वाली है। क्या उस दिन वित्त मंत्री सब्सिडी आवंटन करेंगी। ये कदम सब्सिडी वंचितों की मदद के लिए अहम है और विशेष रूप से भोजन, ईंधन और उर्वरकों को कवर करती हैं।
इसका उद्देश्य किफायती भोजन तय करना, ऊर्जा लागत कम करना और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना है, जिससे खास तौर से पूरे भारत में किसानों को फायदा मिलेगा।

चालू वित्त वर्ष में सब्सिडी आवंटन
इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का बजट 48 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। इसमें से 37 लाख करोड़ रुपए राजस्व एक्सपेन्स के लिए तय किए गए हैं, जिसमें वेतन और सब्सिडी जैसे गैर-परिसंपत्ति सृजन एक्सपेन्स शामिल हैं। 11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पूंजीगत एक्सपेन्स के लिए अलग रखे गए हैं, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे परिसंपत्ति निर्माण करना है।
राजस्व एक्सपेन्स के भीतर लगभग 4.28 लाख करोड़ रुपए या कुल बजटीय लागत का लगभग 9% सब्सिडी के लिए आवंटित किया गया है। इसका मतलब यह है कि इस साल सरकार द्वारा खर्च किए गए हर 10 रुपए में से एक रुपया गरीबों और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
खाद्य सब्सिडी सबसे बड़ा घटक
सब्सिडी बिल में खाद्य सब्सिडी का हिस्सा सबसे बड़ा है। इसमें जरूरतमंद लोगों को सब्सिडी वाला भोजन उपलब्ध कराने पर खर्च शामिल है। वित्त वर्ष 2022-23 में वास्तविक बिल 2.73 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि इस राशि में कटौती की योजना थी, लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमानों में 2.12 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की वृद्धि का संकेत है।
फर्टिलाइजर सब्सिडी उत्पादकों को सहायता
फर्टिलाइजर सब्सिडी दूसरे स्थान पर है और यह सीधे किसानों को नहीं बल्कि उर्वरक निर्माताओं को दी जाती है। चालू वर्ष के लिए यूरिया और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दोनों को कवर करते हुए 1.65 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में बढ़ते खर्च को दिखाने वाले ऐतिहासिक रुझानों के कारण वास्तविक एक्सपेन्स अक्सर इन आवंटनों से अधिक हो जाता है।
ईंधन सब्सिडी कम हुआ बोझ
पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों के नियंत्रण मुक्त होने के बाद ईंधन सब्सिडी खर्च में समय के साथ काफ़ी कमी आई है। इस वित्तीय वर्ष में ईंधन सब्सिडी पर केवल 12,000 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है, जिसमें मुख्य रूप से एलपीजी को टारगेट किया जाएगा।
भारतीय संविधान में यह अनिवार्य किया गया है कि सरकार केंद्रीय बजट के माध्यम से सालाना अपनी अनुमानित प्राप्तियों और एक्सपेन्स को प्रस्तुत करे। यह दस्तावेज़ इस बात पर प्रकाश डालेगा कि खाद्य, उर्वरक और ईंधन सब्सिडी जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए कितना समर्थन दिया जाएगा, साथ ही भारत की ज़रूरतमंद आबादी की सहायता के लिए महत्वपूर्ण अन्य सामाजिक और आर्थिक सहायता कार्यक्रमों को भी संबोधित किया जाएगा।
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