Budget 2025: पेपरलेस बजट से लेकर सबसे छोटी स्पीच तक, बजट 2025 से जुड़े हैं ये 10 इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

Budget 2025: 1 फरवरी को बजट 2025 वित्त मंत्री निर्माला सितारमण पेश करने वाली हैं। बजट को लेकर आम जनता को कई सारी उम्मीदें हैं। हर किसी की नजह इस बात पर टिकी हुई है कि बजट में इस बार क्या खास ऐलान होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजट से जुड़ी कई ऐसी कई खास बातें हैं जो आज भी लोग नहीं जानते हैं। आइए इन इंटरेस्टिंग फैक्ट्स के बारे में आपको बताते हैं।

Budget 2025

पहला बजट कब हुआ था पेश?

देश का पहला बजट साल अप्रैल 7,1860 में पेश हुआ था। इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जो जेम्स विल्सन ईस्ट इंडिया कंपनी के स्कॉटिश इकोनॉमिस्ट और राजनीतिज्ञ थे।

स्वतंत्रता के बाद कब पेश हुआ था बजट

हमारे देश की स्वतंत्रता के बाद, भारत का पहला बजट वित्त मंत्री आर.के. शानमुखम चेट्टी द्वारा 26 नवंबर, 1947 को प्रस्तुत किया गया था। यह एक अंतरिम बजट था, जो देश की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए 31 मार्च, 1948 तक 7.5 महीने की समय अवधि को कवर करता था।

किसने दी थी सबसे लंबी स्पीच?

वित्त मंत्री निर्माला सितारमण ने फरवरी 2020 में सबसे लंबी बजट स्पीच थी और ये 2 घंटे 42 मिनट का भाषण था।

बजट से पहले क्यों होती है हलवा सेरेमनी?

बजट से पहले हलवा सेरेमनी की परंपरा हर बार होती है। पारंपरिक समारोह है जिसमें हर साल, हलवा, एक पारंपरिक भारतीय मिठाई तैयार की जाती है और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को परोसा जाता है जो बजट तैयार करने में शामिल होते हैं। यह सरकार द्वारा अभी भी पालन की जाने वाली सबसे लंबे समय से चली आ रही परंपराओं में से एक है।

बजट हुआ था लीक

1950 में वित्त मंत्री जॉन मथाई के कार्यकाल में केंद्रीय बजट की छपाई के दौरान ही लीक हो गई थी। लीक के बाद बजट छापने राष्ट्रपति भवन से मिंटो रोड पर स्थानांतरित कर दी गई थी। बाद में 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया।

शब्दों के आधार पर सबसे लंबी स्पीच

'शब्दों के आधार' से सबसे लंबा बजट भाषण 1991 में नरसिम्हा राव सरकार के दौरान मनमोहन सिंह ने दिया था, जिसमें कुल 18,650 शब्द थे।

सबसे छोटी स्पीच

सबसे छोटा बजट भाषण वित्त मंत्री हीरूभाई मुल्जीभाई पटेल ने 1977 में दिया था, जिसमें केवल 800 शब्द थे।

पेपरलेस फार्मेट में पेश हुआ था बजट

2021 में, केंद्रीय बजट भारत के इतिहास में पहली बार 'कागज़ रहित प्रारूप' में प्रस्तुत किया गया, जो COVID-19 महामारी से प्रेरित था।

अंग्रेजी में पेश हुआ था ये बजट

1955 तक केंद्रीय बजट केवल अंग्रेजी में ही पेश किया जाता था । बाद में (1955-56) कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने बजट पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों में छापने का फैसला किया और वार्षिक वित्तीय दस्तावेज पेश किया गया। इस परंपरा की शुरुआत वित्त मंत्री सीडी देशमुख ने की थी।

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