Budget 2025: भारत में केंद्रीय बजट 2025-26 के बारे में हर तरफ चर्चा हो रही है। व्यापार संगठनों ने सरकार के सामने कुछ मांगों की लिस्ट प्रस्तुत की है। ये मांगें लेबर वेलफेयर, टैक्सेशन और सोशल सिक्योरिटी में सुधारों पर केंद्रित हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट से पहले बैठक के दौरान, यूनियन नेताओं ने लेबर वेलफेयर वर्ग, गिग इकॉनमी लेबर और सोशल वेलफेयर को प्राथमिकता देने के महत्व पर जोर दिया है। आइए इसके बारे में आपको बताते हैं।

सैलरी स्ट्रचर को अपडेट करने की मांग
व्यापार संगठनों की एक प्रमुख मांग यह है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये मासिक किया जाए। व्यापार संगठनों ने सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रचर को अपडेट करने के लिए 8वें वेतन आयोग की स्थापना की भी मांग कर रही हैं। पिछला आयोग फरवरी 2014 में स्थापित किया गया था।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग
व्यापार संगठनों (ट्रेड यूनियनों) ने इन्फॉर्मल और गिग इकॉनमी के कर्मचारियों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है। उन्होंने इन कर्मचारियों की जरूरतों के हिसाब से सामाजिक सुरक्षा योजना की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने का आग्रह किया, यह तर्क देते हुए कि यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की तुलना में बेहतर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
रिटायर्ड लोगों के वित्तीय बोझ को कम करने की कोशिश
टैक्सेशन के मामले में यूनियनों ने आयकर छूट सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये सालाना करने का प्रपोजल भी रखा है। उन्होंने रिटायर्ड लोगों के वित्तीय बोझ के कारण पेंशन से प्राप्त आय को पूरी तरह से टैक्स फ्री बनाने का भी सुझाव दिया। इसके अलावा, इनफॉर्मल सेक्टर के लेबर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ के लिए सुपर-रिच पर अतिरिक्त 2% टैक्स लगाने की सिफारिश की गई है। ट्रेड यूनियनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के प्राइवेटाइजेशन का विरोध किया है।
इसके अलावा एनएफआईटीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के लिए अलग-अलग बजट अलॉट करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करने वाली हैं, ऐसे में सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देगी, इस पर सबका ध्यान होने वाला है।
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