Budget 2025: देश का केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होगा. इसमें अलग-अलग सेक्टर की कई मांगें हैं. इसको को लेकर स्टेकहोल्डर्स और लीडर्स सरकार के साथ मीटिंग्स कर रहे. इस कड़ी में हेल्थ और एजुकेशन एक्सपर्ट ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट मीटिंग में शामिल हुए, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुआ.
प्री-बजट मीटिंग में हुई चर्चा
नहाल ही में हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर के लीडर्स ने निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट मीटिंग की. इसमें विभिन्न मांगें सामने आईं, जिनमें कैंसर ट्रीटमेंट इक्विपमेंट और दवाओं पर इंपोर्ट कम करने का अनुरोध भी शामिल था. खासकर टाटा मेमोरियल अस्पताल के डायरेक्टर कैलाश शर्मा ने लिनैक मशीनों पर ड्यूटी कम करने की मांग की.
विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति राज नेहरू ने शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की जरूरतों पर फोकस किया. जी बिजनेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मीटिंग में प्राथमिक बाल देखभाल, अनुसंधान और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर भी चर्चा हुई. शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल और एआई प्रशिक्षण शुरू करने का प्रस्ताव था.

शिक्षा और प्रशिक्षण पर फोकस करें
बैठक में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई. इस नीति का उद्देश्य समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करके भारत के शैक्षिक परिदृश्य को बदलना है. सीखने के परिणामों को बढ़ाने के लिए शिक्षण विधियों में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने पर जोर दिया गया.
बजट ऐलान से पहले अलग-अलग सेक्टर्स एक्सपर्ट वित्त मंत्री के साथ परामर्श कर रहे हैं. ये मीटिंग्स सटेकहोल्डर्स को अपनी क्षेत्र-विशिष्ट मांगों को सीधे सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देती हैं. इस तरह की बातचीत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने वाली नीतियों को आकार देने में मदद करती हैं.
प्री-बजट मीटिंग में चर्चा
हर साल बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले उद्योग जगत के नेता वित्त मंत्री से मिलते हैं. इन मीटिंग का ध्यान अक्सर फिस्कल पॉलिसी पर फोकस होता है जो विकास को बढ़ावा दे सकती हैं. स्टेकहोल्डर्स का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी बजट में उनके क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए.


Click it and Unblock the Notifications