Budget 2025: भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने 2025-26 के केंद्रीय बजट के लिए कई सिफारिशें पेश की हैं. इनमें से खपत को बढ़ावा देने और महंगाई पर काबू पाने के लिए फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का सुझाव दिया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य डिस्पोजेबल इनकम को बढ़ाना है, खास तौर से लोअर-इनकम क्लास को फायदा पहुंचाना है, जो फ्यूल की कीमतों से काफी प्रभावित होते हैं. साथ ही इनकम टैक्स दरों में थोड़ी कमी करने की भी राय दी है.
घरेलू खपत बढ़ाने पर फोकस
सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए घरेलू खपत की अहमियत पर फोकस किया. उन्होंने कहा कि महंगाई ने कंज्युमर की पर्चेजिंग पावर को कम कर दिया है. ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने और इकोनॉमिक पेस को बनाए रखने के लिए स्पेंडिंग को प्रोत्साहित करने पर फोकस कर सकते हैं.
टैक्सेशन और आय को लेकर दिए सुझाव
सीआईआई ने सालाना 20 लाख रुपए तक की पर्सनल इनकम के लिए दरों में मामूली कटौती की भी सिफारिश की है. उनका मानना है कि यह बढ़ी हुई खपत के सायकल को बढ़ावा दे सकता है, जिससे हाई ग्रोथ और टैक्स रेवेन्यू प्राप्त होगा. व्यक्तिगत के लिए हाइएस्ट मार्जिनल इनकम टैक्स 42.74% और कॉर्पोरेट टैक्स रेट 25.17% के बीच मौजूदा अंतर काफी अहम है.

CII ने रूरल एरिया में सुधार के लिए मनरेगा, पीएम-किसान और पीएमएवाई जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के तहत लाभ बढ़ाने का सुझाव दिया है. दरअसल, हाल की तिमाहियों में ग्रामीण खपत में पॉजिटिव संकेत मिले हैं.
सरकारी योजनाओं को बढ़ावा देना
सीआईआई ने मनरेगा के तहत डेली मिनिमम वेजेज 267 रुपए से बढ़ाकर 375 रुपए करने का प्रस्ताव रखा है. जैसा कि 2017 में 'राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी निर्धारण पर विशेषज्ञ समिति' ने सिफारिश की थी. इस बदलाव के लिए 42,000 करोड़ रुपए के अलावा खर्च की आवश्यकता होगी.
इसके अलावा वे पीएम-किसान के तहत प्रति लाभार्थी सालाना भुगतान को 6,000 रुपए से बढ़ाकर 8,000 रुपए करने का भी सुझाव दिया है. इससे अनुमानित 10 करोड़ लाभार्थियों के साथ 20,000 करोड़ रुपए की एक्स्ट्रा कॉस्ट आएगी.
खपत वाउचर की भी सलाह
सीआईआई की ओर से कम आय वाले ग्रुप्स के लिए उपभोग वाउचर शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है. इन वाउचर का इस्तेमाल एक निश्चित समय सीमा (6-8 महीने) के भीतर खास आइट्स और सर्विसेज के लिए किया जाएगा, जिससे जन-धन खाताधारकों में खर्च को बढ़ावा मिलेगा जो अन्य कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में नहीं आते.
फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का सुझाव
सीआईआई ने बताया कि पेट्रोल की खुदरा कीमत में केंद्रीय उत्पाद शुल्क का हिस्सा करीब 21% और डीजल का 18% है. मई 2022 से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40% की गिरावट के बावजूद इन चार्जेज को बदला नहीं किया गया है. जबकि इनको कम करने से महंगाई को कम करने और डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
सीआईआई ने पीएमएवाई-जी और पीएमएवाई-यू योजनाओं के तहत यूनिट लागत को संशोधित करने की भी मांग की है, जो अपनी शुरुआत से ही अपरिवर्तित बनी हुई हैं. ये
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