Budget 2024 News: 1 फरवरी को साल 2024 का यूनियन बजट आने वाला है और इस दौरान होने वाली घोषणाओं पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। विशेषज्ञ फरवरी में आने वाले अंतरिम बजट को लेकर भी कई अनुमान लगा रहे हैं। गौरतलब कि यह मौजूदा सरकार का आखिरी बजट होगा। ऐसा इस लिए है क्योंकि इस बजट के बाद लोकसभा चुनाव होने हैं और चुनाव में जीतकर आने वाली सरकार पूर्णकालिक बजट पास करेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव से पहले केंद्र सरकार अपने वोट बैंक को बेहतर बनाने के लिए नौकरी पेशा लोगों के लिए इस अंतरिम बजट में कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकती है। इन नए नियमों में एक हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी मिल सकती है और सैलरी को लेकर भी बदलाव किए जा सकते हैं। आइए आपको इनके बारे में विस्तार से बताते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार साल 2024 के फरवरी की पहली तारीख को सरकार द्वारा पेश किया जा रहे यूनियन बजट में लेबर लॉ ले आने की घोषणा की जा सकती है। इससे कई बदलाव हो सकते हैं।

कम हो सकती है इन हैंड सैलरी
मिल नहीं जानकारी के मुताबिक नए नियम में कर्मचारियों की तनख्वा तो घट सकती है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला प्रोविडेंट फंड काफी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बेसिक सैलरी टोटल सैलरी का 50 प्रतिशत यानी आधा या उससे अधिक होना चाहिए। अगर आपकी बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का पैसा पहले के मुकाबले ज्यादा कट सकता है, इससे आपको मिलने वाली इन हैंड सैलेरी तो काम हो जाएगी लेकिन आपकी पीएफ और ग्रेच्युटी में जमा की जाने वाली धनराशि बढ़ जाएगी, जिसका फायदा आपको रिटायरमेंट के बाद मिल सकता है।
इस वजह से देनी होगी 3 दिन की छुट्टी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लेबर कोड में कई नियम हैं। इनमें से एक नियम के अनुसार अगर कंपनी चाहे तो अपने कर्मचारियों से 12 घंटे तक काम ले सकती है। लेकिन ऐसा करने की एक शर्त है। मिल रही जानकारी के मुताबिक अगर कंपनी अपने कर्मचारियों से 12 घंटे काम लेती है तो उसे उन्हें हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी देना देना भी अनिवार्य रहेगा। अगर कंपनी 12 घंटे तक लगातार चार दिन काम लेती है, तो यह एक हफ्ते में 48 घंटे होगा, जो हफ्ते के 6 दिन रोजाना 8 घंटे काम करने के बराबर है। शायद यही वजह है कि एक दिन में 12 घंटे काम करने पर कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी देनी पड़ेगी।
क्या है लेबर कोड
आपको बताते चलें की लेबर कोड को 4 भाग में बांटा गया है। इन कोड के अंतर्गत इंडस्ट्रियल रिलेशंस, सैलरी, व्यावसायिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, हेल्थ और काम करने की स्थिति जैसे कानून शामिल हैं। इसे पास करने के लिए केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन नियमों के बारे में बताया जाना जरूरी है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है तो यह लेबर कोड पास नहीं किया जा सकता है। इस लेबर कोड को पास करने के लिए सभी राज्य सरकारों को भी इन नियमों को नोटिफाई करना जरूरी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक अब तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कोड को रेडी कर लिया है।
More From GoodReturns

FD की नई दरें: इन 4 बैंकों में सीनियर सिटीजन्स को मिल रहा 8.30% तक ब्याज, जानें निवेश का सही तरीका

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: 1 सितंबर को जानें अपने शहर में 22K और 24K के ताजा रेट

399 रुपये से कम में बेस्ट OTT प्लान: Jio, Airtel और Vi में से कौन सा है पैसा वसूल?

पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: आज आपके शहर में क्या है कीमत? जानें पूरा गणित

LIC की नई पॉलिसी लॉन्च: 'बीमा प्लेटिनम' और 'जीवन रक्षा' में से कौन सी है आपके लिए बेस्ट?

IMD अलर्ट: भारी बारिश में गाड़ी-घर का नुकसान? क्लेम पाने का आसान तरीका

Vi का 859 रुपये वाला धांसू प्लान: 180 दिनों की वैलिडिटी और अनलिमिटेड डेटा, क्या आपको मिला यह ऑफर?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: 4 सितंबर को आपके शहर में बैंक बंद या खुले? चेक करें पूरी लिस्ट

Gold and Silver Price Today: 7 सितंबर को सोने-चांदी के भाव क्या आज खरीदारी का सही मौका है? जानें ताजा रेट

Gold Price 2 सितंबर को सोने-चांदी के भाव में स्थिरता, क्या आज खरीदारी करना है फायदे का सौदा? जानें ताजा रेट

EPFO Enrollment Campaign 2026: पीएफ से छूटे कर्मचारियों के लिए आखिरी मौका, 31 अक्टूबर तक करें आवेदन



Click it and Unblock the Notifications
