
Budget 2023 : देश की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री सरकार से उम्मीद कर रही है। कि सरकार बजट में इस इंडस्ट्री को सपोर्ट देने का जो सिलसिला है। इस सिलसिले को जारी रखेगी। इसके साथ ही सरकार ऐसे कदम को भी आगे उठाएगी। जिससे गाड़ियों की मांग बढ़े। ऑटो सेक्टर में देश ने पिछले वर्ष काफी बेहतर ग्रोथ हासिल की है। भारत इस समय लगभग 42 लाख गाड़ियों की बिक्री के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है।
बजट में आई सरकारी योजना इसकी ग्रोथ में भूमिका निभा रही है
पिछले कुछ बजट में आई जो सरकारी योजना है। इसकी ग्रोथ में इसकी भी भूमिका रही है। इसमें कई सारी योजनाएं है। जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए एफएएमई स्कीम या सीएनजी और हाइड्रोजन गाड़ियों पर फोकस और पीएलआई जैसी स्कीम है। जो ऑटो सेक्टर है। इस बार एक ऐसे ही बजट की उम्मीद कर रहा है। जिस बजट से ऑटो सेक्टर को बूस्ट मिल सके।
एफएएमई स्कीम को 2024 तक आगे बढ़ाने की मांग कर रही है
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट को उम्मीद है। कि इंफ्रा सेक्टर में अधिक निवेश होता है, तो फिर इससे गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी। वहीं, ईवी गाड़ियों से जुड़ी जो कंपनियां है। वे एफएएमई स्कीम को 2024 तक आगे बढ़ाने की मांग कर रही है। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़ी कंपनियां यह भी चाहती है। कि स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी को 5 प्रतिशत रखा जाएं। इसके साथ ही सेल्स पर लगने एक्स बेसिक कस्टम ड्यूटी है इसको हटाया जाए।
एसीएमए सभी कंपोनेंट को 18 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की है
एसीएमए जो कंपोनेंट निर्माताओं की संस्था है। इस संस्था ने सभी कंपोनेंट को 18 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की है। ऑटो सेक्टर उम्मीद कर रहा है। कि इस बार अगर सरकार आयकर में थोड़ी छूट देती है, तो फिर इससे गाड़ियों की मांग बढ़ेगी।
क्या है फेम स्कीम
पेट्रोल और डीजल से चलने वाले जो वाहन हैं। इन वाहनों पर नियंत्रण करने और इलेक्ट्रिकल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से इस योजना की स्कीम की शुरुआत की गई है। यह जो स्कीम है। यह स्कीम राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना का एक अभिन्न अंग है।


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