
Budget 2023 : लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और रोजगार पैदा करने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भूमिका को देखते हुए, आगामी केंद्रीय बजट 2023 में इस सेक्टर को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार अपनी सफल प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के दायरे का विस्तार कर सकती है और अधिक रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को इसमें शामिल कर सकती है।
इन इंडस्ट्रीज को किया जा सकता है शामिल
पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार खिलौने, साइकिल, चमड़ा और जूते का प्रोडक्शन कुछ ऐसे उद्योग हैं, जिन्हें आगामी 1 फरवरी को पीएलआई स्कीम के दायरे में शामिल किया जा सकता है। इस योजना को 14 सेक्टरों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ शुरू किया गया था, जिसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट, सफेद सामान, कपड़ा, फूड प्रोडक्ट, हाई एफिशिएंसी सोलर पीवी मॉड्यूल, एडवांस्ड रसायन सेल और स्पेशियलिटी स्टील शामिल हैं।
क्या है योजना का उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को विश्व स्तर पर कॉम्पिटीटिव बनाना और मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक चैंपियन बनाना है। सरकार की पीएलआई स्कीम ठोस नतीजे भी दे रही है। उन्होंने कहा कि खिलौने और चमड़ा जैसे विभिन्न सेक्टरों को पीएलआई योजना का लाभ देने के एक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाना है, जो कि काफी एडवांस्ड फेज में है, और इस बात की संभावना है कि यह बजट में शामिल हो सकता है। कहा जा रहा है कि पिछले वर्ष आवंटित राशि में से कुछ राशि बची है, जिसे अन्य सेक्टरों के लिए अलॉट किया जा सकता है।
सेक्टरों में बढ़ेगा निवेश
पीएलआई योजना से सरकार का लक्ष्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करना है। सरकार का मानना है कि सभी सेक्टरों में हायर लोकल मैन्युफैक्चरिंग अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने, निर्यात बढ़ाने और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक मुख्य हिस्सा बनाने में मदद कर सकता है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीएलआई योजना में सितंबर 2022 तक 4,784 करोड़ रुपये का निवेश आया है और 80,769 करोड़ रुपये के निर्यात सहित कुल 2,03,952 करोड़ रुपये का उत्पादन हुआ है।

650 आवेदनों को मंजूरी
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 16 दिसंबर, 2022 को जारी एक बयान में कहा था कि अब तक 13 योजनाओं के तहत 650 आवेदनों को मंजूरी दी गई है और 100 से अधिक एमएसएमई थोक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, दूरसंचार, सफेद वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में पीएलआई लाभार्थियों में शामिल हैं। यह योजना विशेष रूप से स्ट्रेटेजिक सेक्टरों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, आयात बिलों को कम करने, घरेलू रूप से निर्मित वस्तुओं की कॉस्ट कॉम्पिटीटिव में सुधार करने और घरेलू क्षमता और निर्यात को बढ़ाने के लिए तैयार की गई थी।
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