
PAN : भारत में जल्द ही परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) एक मात्र बिजनेस आइडेंटिफिकेशन नंबर बन सकता है। आम बजट 2023 के माध्यम से इसे कानूनी समर्थन मिलने की भी चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह माना जा रहा है कि इसका उद्देश भारत में बिजनेस शुरू करने की प्रकिया को आसान बनाना है। इसके साथ ही बिजनेस चलाने की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाना है। साथ ही इसका उद्देश्य बिजनेसेज के लिए कंप्लायंस का बोझ को भी कम करना है। देश में वर्तमान में कारोबारियों को कई सारे उद्देश के आइडेंटिफिकेशन नंबर लेने पड़ते हैं। जैसे- टैक्स के लिए रजिस्ट्रेशन, लोन लेने या बैंक अकाउंट खुलवाने आदि। हालांकि, जो पैन कार्ड है। इसका उपयोग पहले से ही टैक्स के लिए किया जा रहा है। अब प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए दक्षता बढ़ाने के लिए एक मात्र बिजनेस आइडेंटिफिकेशन नंबर का दर्जा दिए जाने पर विचार चल रहा है।
पैन नंबर कैसे कारोबारियों के एक मात्र पहचान बनेगा
आयकर विभाग की तरफ से जारी होने वाला 10 डिजिट के अल्फा न्यूमेरिक नंबर यानी पैन व्यक्तिगत या एंटिटीस के टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए उनके पास होना अनिवार्य है। इसका इस्तेमाल केवल इतना ही नहीं हैं। इसके साथ ही एक लिमिट के अधिक वित्तीय लेनदेन के लिए भी पैन नंबर होना जरूरी होता है। यदि बजट में यह ऐलान होता है, तो फिर भविष्य में पैन बिजनेसेज के विभिन्न कंप्लायंस के लिए एक मात्र आइडेंटिफायर के रूप में उपयोग किया जाएगा।
इससे सबसे अधिक फायदा एसएमई होगा
लघु और मझोले उपक्रमों (एसएमई) को इस कदम से लाभ होने की उम्मीद है। दरअसल, उन्हें कंप्लायंस की आवश्यकता को पूरी करने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही बहुत आइडेंटिफिकेशन नंबर लेने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एसएमई के लिए रिसोर्सेज और समय की बचत होगी
अगर एक ही बिजनेस आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है, तो फिर इससे एसएमई के लिए रिसोर्सेज और समय की बचत होगी और वे अपने व्यापार को बढ़ाने के फोकस कर सकेंगे। पैन का एक मात्र बिजनेस आइडेंटिफिकेशन नंबर के रूप में उपयोग होने से देश में जो ट्रांसपरेंसी और विश्वास है। इसके बढ़ने का अनुमान है।


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