Budget 2023 : ये सिफारिशें हुईं पूरी, तो शेयर बाजार हो जाएगा गुलजार
budget 2023

Budget 2023 : भारतीय शेयर बाजार कोरोना काल के 2 वर्षों में तेजी से बढ़ा। लेकिन अब पिछले छह महीनों से शेयर बाजार में एक्टिव निवेशकों की संख्या में लगातार गिरावट दिख रही है। सबसे पहले, 2 साल की तेजी के बाद, रूस-यूक्रेन युद्ध, स्थानीय आर्थिक फैक्टर्स, नियमों में बदलाव और इंडिविजुअल निवेशकों की जोखिम क्षमता या निवेश रणनीतियों में बदलाव के कारण शेयर बाजार में गिरावट देखी गयी। दूसरा, हाल के कई रेगुलेटरी बदलावों से भी भारतीय शेयर बाजार में एक्टिव पार्टिसिपेंट्स की संख्या में गिरावट आई है। तीसरा, जटिल टैक्स कानून और नियम निवेशकों के लिए बोझ बन सकते हैं और कुछ को शेयर बाजार में भाग लेने से हतोत्साहित भी कर सकते हैं। पर जानकार मानते हैं कि यदि आगामी बजट में कुछ कदम उठाए जाते हैं तो शेयर बाजार में फिर से तेजी आ सकती है।

इनकम क्लासिफिकेशंस

इनकम क्लासिफिकेशंस

कैपिटल मार्केट के लेन-देन से होने वाली इनकम को कई अलग-अलग कैटेगरियों में बांटा गया है। इंट्राडे कैश ट्रेडिंग को स्पेक्यूलेटिव इनकम के रूप में क्लासिफाई किया जाता है, लेकिन इंट्राडे डेरिवेटिव ट्रेड को बिजनेस इनकम के रूप में क्लासिफाई किया जाता है। इसके अलावा 1 वर्ष से कम के नॉन-इंट्रा-डे ट्रेडों को शॉर्ट टर्म के रूप में क्लासिफाई किया जाता है। जानकार कहते हैं कि शेयर बाजार में नए निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीजीसी) टैक्स छूट को 1 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर धारा 111ए के अंतर्गत 15 फीसदी की दर से टैक्स लगाया जाता है (सरचार्ज और सेस सहित)।

ट्रेडिंग और निवेश में टैक्सेशन को आसान बनाएं

ट्रेडिंग और निवेश में टैक्सेशन को आसान बनाएं

कई निवेशक और ट्रेडर्स को यह समझने में दिक्कत आती है कि टैक्स लायबिलिटी तय करने के लिए किसी एसेट को लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म के रूप में कैसे क्लासिफाई किया जाता है। हासिल किए गए मुनाफे पर कम की गयी टैक्स रेट के लिए पात्र लंबी अवधि की कैपिटल एसेट के लिए, डेब्ट फंड की यूनिट्स को कम से कम तीन साल के लिए रखा जाना चाहिए। इक्विटी फंड की यूनिट्स के लिए यह अवधि एक साल है और रियल एस्टेट और नॉन-लिस्टेड स्टॉक के लिए दो साल। इसे आसान बनाने के लिए, जानकार मानते हैं कि डेब्ट को लॉन्ग टर्म के रूप में क्लासिफाई करने के लिए अवधि को 3 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष कर दिया जाए। इससे लॉन्ग टर्म इंस्ट्रूमेंट क्लासिफिकेशन की जटिलता कम होगी और डेब्ट इंस्ट्रूमेंट में अधिक रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी।

Budget 2023: मोदी सरकार रेल किराए में दे सकती है छूट! बजट में क्या होगा ऐलान? | GoodReturns
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) और कमोडिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी)

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) और कमोडिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी)

जानकार एसटीटी और सीटीटी पर भी दोबारा गौर करने को कहते हैं। इन्हें ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए बोझ माना जाता है। एसटीटी इस समय शेयर बाजार में इक्विटी और डेरिवेटिव लेनदेन पर लगाया जाता है। यह एक डायरेक्ट टैक्स है जो सरकार निवेशकों से वसूलती है। डिलीवरी-आधारित लेनदेन पर टैक्स रेट 0.01% है, और इंट्राडे लेनदेन पर दर 0.05% है। सीटीटी भारत में कमोडिटी लेनदेन पर लगाया जाने वाला एक इनडायरेक्ट टैक्स है। कमोडिटी लेनदेन के नेचर के आधार पर, टैक्स रेट टर्नओवर के 0.01% से 0.125% तक होती है। एसटीटी और सीटीटी के लागू होने से शेयर बाजार में लिक्विडिटी को नुकसान हुआ है, जिसके नतीजे में निवेशकों के लिए लागत बढ़ी है और लाभप्रदता कम हुई है।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+