Budget 2023 : 5.93 लाख करोड़ रु के रक्षा बजट का ऐलान, पिछले साल से करीब 13 फीसदी अधिक

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Defence Budget 2023 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को बजट पेश किया। उन्होंने 2023-24 के लिए रक्षा बजट के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपये का ऐलान किया। उन्होंने पिछले साल के 5.25 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल आवंटित राशि को बढ़ाया है। ये करीब 12.95 फीसदी की बढ़ोतरी है। बजट रिपोर्ट में कहा गया है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) के लिए कुल 1.62 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं, जिसमें नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य सैन्य हार्डवेयर खरीदना शामिल होगा। 2022-23 के लिए कैपेक्स के लिए बजटीय आवंटन 1.52 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन संशोधित अनुमान में खर्च को 1.50 लाख करोड़ रुपये दिखाया गया है।

कितना है रेवेन्यू एक्सपेंडिचर
2023-24 के बजट दस्तावेजों के अनुसार, रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के लिए 2,70,120 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिसमें वेतन भुगतान और एस्टेब्लिश्मेंट के रखरखाव पर होने वाला खर्च शामिल है। 2022-23 में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का बजटीय आवंटन 2,39,000 करोड़ रुपये था। 2023-24 के बजट में, रक्षा मंत्रालय (सिविल) के लिए कैपेक्स 8,774 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि कैपेक्स के तहत 13,837 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। रक्षा पेंशन के लिए अलग से 1,38,205 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। पेंशन एक्सपेंस सहित कुल रेवेन्यू एक्सपेंडिचर 4,22,162 करोड़ रुपये अनुमानित है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, कुल रक्षा बजट इस तरह 5,93,537.64 करोड़ रुपये का है।

एमएसएमई के लिए बड़े ऐलान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कोविड से प्रभावित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) सेक्टर के लिए खास ऐलान किया। इस सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की गयी है कि एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी योजना को 9,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ बढ़ाया जाएगा। यानी एमएसएमई के लिए नयी 9000 रु की इमरजेंसी क्रेडिट स्कीम का ऐलान किया गया है। केंद्रीय बजट की घोषणा करते हुए, सीतारमण ने कहा कि इससे एमएसएमई को 2 लाख करोड़ रुपये के लोन के लिए कोलेट्रेल की सुविधा मिलेगी। इससे संकट से गुजर रहे और पैसे की कमी से जूझ रहे एमएसएमई सेक्टर में मनी फ्लो को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित योजना 1 अप्रैल, 2023 से प्रभावी होगी। अनुमान है कि यह योजना उन बैंकों को राहत देगी जो आमतौर पर उचित कोलेट्रल के न होने के कारण एमएसएमई को लोन देने से हिचकते हैं।

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