नई दिल्ली, जनवरी 30। बैंकिंग इंडस्ट्री एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जिसके लिए एडवांस टेक्नोलॉजी, एनालिटिक्स और डिजाइन स्किल्स वाले संगठनों की जरूरत है। पब्लिक सेक्टर के ऑपरेशनल स्ट्रक्चर और सीमाएं भारत में बैंकिंग सेक्टर के लिए जरूरी परिवर्तन को मुश्किल बना देती हैं। इसके बावजूद इस इंडस्ट्री के जानकारों को बजट से काफी उम्मीदें हैं। इन जानकारों को देश के सार्वजनिक बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की उम्मीद है। अधिक निवेश और टेक्नोलॉजी के उपयोग के नतीजे में अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है, इसलिए इन बैंकों के लिए परिवर्तन आवश्यक है। आगे जानिए कि बजट में क्या खास हो सकता है।
पेश किया जा सकता है ब्लूप्रिंट
वित्त मंत्री के बजट भाषण में पब्लिक सेक्टर बैंकों के सुधार का खाका शामिल हो सकता है। आगामी बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्थिरता को भी दिशा देगा, जो पिछले साल इन बैंकों के बीच हुए विलय के साथ शुरू हुई थी।
विदेशी बैंकों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स कम
भारत में विदेशी बैंक शाखाओं को 40 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स देना होता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 से शुरू करके सरकार ने घरेलू एंटरप्राइजेज के लिए कॉर्पोरेशन टैक्स रेट को 30 फीसदी से घटा कर 22 फीसदी कर दिया है। इस बदलाव के नतीजे में विदेशी और घरेलू बैंकों की कॉर्पोरेट टैक्स रेट में असमानता बढ़ी है। इसे देखते हुए, बैंक शाखाओं सहित विदेशी एंटरप्राइज के लिए हेडलाइन कॉर्पोरेट टैक्स की दर को कम करना आवश्यक है। कम टैक्स रेट के माध्यम से भारत में अंतरराष्ट्रीय बैंकों के लिए एक उचित माहौल बनाने से देश को कई तरह से लाभ हो सकता है।
अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक
जानकारों का मानना है कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का कुछ अन्य बैंकों के साथ विलय करके इन बैंकों में चल रही वर्तमान दिक्कतों का समाधान करना जरूरी होगा। सरकार विदेशी बैंकों, निजी बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एनबीएफसी और फिनटेक जैसी विनियमित कंपनियों को इस काम के लिए प्रस्ताव दे सकती है।
विदेशी बैंकों के लिए एक और जरूरी कदम
आयकर कानून में भारत सरकार ने विशेष प्रावधानों को शामिल किया था जिसके तहत एक विदेशी बैंक की शाखा पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (डब्ल्यूओएस) टैक्स फ्री हो जाती है, बशर्ते कुछ कंडीशंस को पूरा किया गया हो। इस मामले पर ब्रांच से डब्लूओएस के टैक्स मामलों का सीमलेस ट्रांसफर और कंटिन्यूएशन प्रदान करना आवश्यक है। इसके अलावा प्रतिकूल आर्थिक माहौल को देखते हुए और बैंकिंग उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए बेड और डाउटफुल डेब्ट प्रोविजंस के लिए आयकर में ज्यादा कटौती की मांग भी की गयी है।
More From GoodReturns

नया मल्टी-एसेट NFO: SIP या एकमुश्त, निवेश से पहले ये 5 बातें जरूर जानें

Sugar Stocks: चीनी की कीमतों में आग, इन 7 शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग की दमदार रणनीति

EMI और क्रेडिट कार्ड बिल: सोमवार को बैंक अकाउंट में रखें बैलेंस, वरना कटेगा भारी जुर्माना

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Airtel का बड़ा झटका: अचानक बंद हुए कई लोकप्रिय प्रीपेड प्लान, रिचार्ज से पहले जानें ये जरूरी बात

जियो नेटफ्लिक्स बिलिंग में अचानक बदलाव! कहीं आपका प्लान तो नहीं हुआ डाउनग्रेड? चेक करें तुरंत

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

IPO बंद होने का आखिरी मौका: आज शाम 5 बजे से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना अटक सकता है पैसा

PMFBY खरीफ 2026: आज है रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, बैंक बंद होने पर भी ऐसे करें आवेदन

Shiprocket Listing Today: शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! क्या ₹120 के पार खुलेगा भाव?



Click it and Unblock the Notifications