नई दिल्ली, जनवरी 9। भारत का लक्ष्य 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। ये एक बड़ी महत्वाकांक्षा है। मगर वहीं दूसरी तरफ देश में बढ़ते कोविड मामलों के बीच एक और लॉकडाउन और सप्लाई में बाधा का जोखिम सामने आ गया है। ऐसे में वित्त मंत्रालय के सामने 1 फरवरी 2022 को ऐसा बजट पेश करने की चुनौती होगी, जो 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के लक्ष्य को पूरा कर सके। इसके लिए जानकार कहते हैं सरकार को कुछ खास पर फोकस करना होगा।

बचत को निवेश में बदलना
ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए अर्थव्यवस्था में निवेश की जरूरत होगी। अब निवेश या तो विदेशी निवेशक कर सकते हैं या फिर दूसरा तरीका है घरेलू बचत (आम लोगों की बचत) को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में लाया जाना। इसके लिए सरकार आसान केवाईसी, कर-बचत म्यूचुअल फंड में निवेश की सीमा को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने जैसे कदम उठा सकती है।
फाइनेंशियल लिट्रेसी एवं पर्सनल फाइनेंस
भारत में दुनिया की लगभग 17 प्रतिशत आबादी रहती है। इनमें 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। मगर फाइनेंशियल लिट्रेसी या वित्तीय साक्षरता दर केवल 24 प्रतिशत है। जानकारों का मानना है कि फाइनेंशियल लिट्रेसी स्कूल में एक विषय होना चाहिए। ताकि एक ऐसा आधार बन सके जो बचत को निवेश में बदल सके। बजट में इस दिशा में नीतिगत कदम काफी बेहतर हो सकता है।
फिनटेक के लिए ऐलान
वे फिनटेक जो माइक्रोक्रेडिट और उधार देने के कारोबार में हैं और उस आबादी तक पहुंच रही हैं, जिन तक एनबीएफसी और बैंक नहीं पहुंच पाते, उनके लिए इंसेंटिव का ऐलान जरूरी है। जानकार मानते हैं कि टैक्स इंसेंटिव प्रोवाइड करने के लिए एक फ्रेमवर्क, फंड तक आसान एक्सेस ऐसी फिनटेक के लिए काफी राहत भरा कदम होगा।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को फिजिकल सोने की मांग को कम करने और घरेलू बचत को फाइनेंशियल बचत में ट्रांसफर करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। लॉक-इन को पांच साल से घटाकर तीन साल करने और तीन साल बाद बाहर निकलने पर एलटीसीजी (लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन) का लाभ उठाने से घरों और लोगों के हाथ में पैसा वापस आ जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था में पैसे का ऑपरेशन बढ़ सकता है।


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