नई दिल्ली, फरवरी 1। सरकार ने बजट में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) का प्रावधान किया है। पिछले बजट में पूंजीगत व्यय लक्ष्य 5.5 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें इस साल के लिए भारी बढ़ोतरी की गयी है। माना जा रहा है कि पूंजीगत व्यय में यह वृद्धि अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेश में भारी वृद्धि के लिए एक खास कदम होगा।

इंवेस्टमेंट साइकिल के फिर से शुरू होने की उम्मीद
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि पूंजीगत खर्च और निजी निवेश में बढ़ोतरी के कारण इंवेस्टमेंट साइकिल के फिर से शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि 2022-23 के लिए कुल खर्च 39.45 ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये आंका गया है। यह जीडीपी का 2.9 फीसदी होगा। पिछले बजट में सरकार ने पूंजीगत खर्च को 34.5 फीसदी बढ़ा कर 5.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया था।
एक्सपर्ट्स ने की थी मांग
विशेषज्ञों ने अर्थव्यवस्था को गति देने और इसे हाई ग्रोथ के रास्ते पर वापस लाने के लिए हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर की बात कही थी। सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, जन परिवहन, जलमार्ग और रसद इंफ्रा को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में लिस्टेड करते हुए सीतारमण ने कहा कि बजट का दृष्टिकोण सात इंजनों द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा सभी सात इंजन एक साथ अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे।
लॉन्च होगी डिजिटल करेंसी
केंद्रीय वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पेश किए गए बजट में डिजिटल करेंसी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ब्लॉकचेन और अन्य तकनीकों का उपयोग करके डिजिटल रुपया जारी किया जाएगा। इस डिजिटल करेंसी को 2022-23 में आरबीआई द्वारा जारी किया जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अब भारत की अपनी डिजिटल करेंसी आगामी वित्त वर्ष में लॉन्च होगी। डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए बजट में डिजिटल यूनिवर्सिटी का ऐलान किया गया है। विश्व स्तरीय शिक्षा के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी।


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