नई दिल्ली, फरवरी 1। आज सभी की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर होंगी, जो सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट 2022 पेश करेंगी। 2019 में वित्त मंत्री के रूप में नियुक्ति के बाद यह सीतारमण का चौथा बजट होगा। 2022 का बजट तय करेगा कि भारत 2022 में अपनी विकास गति को बनाए रखने में सक्षम होगा या नहीं। बता दें कि बजट ऐसे समय पर आ रहा है, जब भारत की अर्थव्यवस्था कोरोनोवायरस महामारी की दो लहरों के बाद अब ठीक हो रही है। लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं जो ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं। पर वित्त मंत्री के सामने दो मुख्य चुनौतियां होंगी। ये हैं महंगाई और बेरोजगारी।

क्या कहते हैं जानकार
जानकारों का मानना है कि महामारी के दौरान सप्लाई में आई अड़चनों ने महंगाई बढ़ाई है। इसके लिए आरबीआई को सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं थी। यह स्थिति आगे जाकर बदल सकती है क्योंकि अर्थव्यवस्था में सुधार दिख रहा है। पर जानकार कहते हैं कि भारत को उच्च मुद्रास्फीति के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें मांग की आपूर्ति से अधिक होने की संभावना है। वहीं भू-राजनीतिक तनावों (रूस-यूक्रेन और यूएई-यमन आदि) के परिणामस्वरूप कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार को बजट में एक रोडमैप पेश करना चाहिए जिससे गरीब और मध्यम आय वाले परिवारों पर बढ़ती महंगाई का असर कम हो सके।
नौकरी संकट
जानकारों के अनुसार देश के युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा करना एक और चीज है जिस पर सरकार को बजट में ध्यान देना चाहिए। ब्लूमबर्ग की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था से 20 करोड़ नौकरियां गायब हैं और सरकार की तरफ से पर्याप्त वित्तीय नीति सपोर्ट के बिना बैलेंस बनाना मुश्किल होगा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के समान शहरी नौकरी गारंटी योजना पेश करना विशेषज्ञों की एक खास सिफारिश रही है। अगस्त 2021 में, एक संसदीय स्थायी समिति ने भी सुझाव दिया था कि सरकार को शहरी मजदूरों के लिए मनरेगा जैसी योजना शुरू करनी चाहिए। ऐसा शहरों में अपनी नौकरी गंवाने वाले लोगों की भारी संख्या को देखते हुए किया जाना चाहिए।


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