नई दिल्ली, जनवरी 6। बजट पेश किए जाने में अब बहुत कम समय बचा है। इस बीच इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) में निवेश की सालाना लिमिट बढ़ाने के मामले में वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा है। सरकार अगले महीने 2022-23 का बजट पेश करने वाली है। आईसीएआई की तरफ से मांग की गयी है कि पीपीएफ में निवेश की लिमिट को बढ़ा कर 3 लाख रु किया जाए। बता दें कि इस तरह की मांग पहली बार नहीं हुई है। बल्कि पहले भी पीपीएफ की निवेश लिमिट बढ़ाने की मांग की गयी है। मगर अभी तक सरकार ने ऐसा किया नहीं है।

प्री-बजट मेमोरेंडम
अपने प्री-बजट मेमोरेंडम में आईसीएआई ने धारा 80सी के तहत कई सुझाव दिए हैं, जिनमें से पीपीएफ से संबंधित है। इसने कहा है कि पीपीएफ में योगदान की वार्षिक सीमा 1.5 लाख रुपये की वर्तमान सीमा से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की जाए। वहीं धारा 80 सीसीएफ के तहत टैक्स कटौती की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की जा सकती है।
जीडीपी को होगा फायदा
आईसीएआई का मानना है कि पीपीएफ की निवेश लिमिट बढ़ाने से जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घरेलू बचत को भी बढ़ावा मिल सकता है और इसका मुद्रास्फीति विरोधी प्रभाव भी सामने आएगा। आईसीएआई के अनुसार पीपीएफ का उपयोग उद्यमियों और प्रोफेश्नल्स द्वारा बचत इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में किया जाता है। सेल्फ एम्प्ल्योड लोगों के लिए उपलब्ध एकमात्र सुरक्षित और टैक्स बचत वाला विकल्प पीपीएफ है। इसलिए, पीपीएफ निवेश सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने का सुझाव रखा गया है।
कई सालों से नहीं बढ़ी लिमिट
बता दें कि पीपीएफ में निवेश की 1,50,000 रुपये की वर्तमान सीमा को कई वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है। आईसीएआई का मानना है कि इस पर फिर विचार की आवश्यकता है। पीपीएफ एक 15 साल की निवेश योजना है जिसके तहत एक निवेशक को जमा, ब्याज और मैच्योरिटी के समय मिलने वाले पैसे पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है। पीपीएफ पर फिलहाल 7.1 फीसदी ब्याज दर है।


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