नई दिल्ली, फरवरी 2। बजट में डेटा सेंटर्स और ऊर्जा स्टोरेज को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के रूप में वर्गीकृत करने की योजना का प्रस्ताव रखा गया है। इससे इन फर्मों को सस्ते और लंबी अवधि के लोन आराम से मिलेंगे। नतीजे में देश के अरबपति कारोबारियों को काफी फायदा होगा, जिनकी इन क्षेत्रों में आक्रामक रूप से आगे बढ़ने की योजना है। इन अरबपति कारोबारियों मे गौतम अडानी, सुनील मित्तल और मुकेश अंबानी शामिल हैं। कल पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डेटा सेंटर और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, जिसमें डेंस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड-स्केल बैटरी सिस्टम शामिल हैं, को इन्फ्रास्ट्रक्चर की अनुरूप लिस्ट में शामिल किया जाएगा। इससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी स्टोरेज के लिए लोन उपलब्धता की सुविधा मिलेगी।
बढ़ेगी डेटा सेंटर्स की मांग
ये पॉलिसी 1 अप्रैल से एक समय पर प्रभावी होगी, जब भारत अपने डेटा को अपनी सीमाओं के भीतर रखने के साथ-साथ ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स और क्वांटम कंप्यूटिंग में भारी उछाल लाना चाहता है। अल्ट्रा-स्पीडी 5जी टेलीकॉम सेवाओं की शुरुआत से डेटा सेंटर सेवाओं की मांग में और वृद्धि होगी, जिससे अडानी और मित्तल के ग्रुप्स और तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जो 76 अरब डॉलर की निवेश योजना के जरिए ऊर्जा भंडारण के लिए एक गीगाफैक्ट्री डेवलप कर रही है, को भी इस नयी पॉलिसी से लाभ होने की संभावना है।
डबल हो जाएगी भारत की डेटा सेंटर कैपिसिटी
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक एक्सपर्ट के अनुसार इन्फ्रास्ट्रक्चर टैग से सस्ते और लंबी अवधि के फंड आराम से मिलने उम्मीद है, जो निवेश को बढ़ावा देगा। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2021 की पहली छमाही में 499 मेगावाट से बढ़कर अगले साल 1,008 मेगावाट हो तक जा सकती है।
क्या है इन कंपनियों का प्लान
एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अडानी ने नवंबर में कहा था कि वह चाहते हैं कि उनका समूह ग्रीन डेटा स्टोरेज में विश्व में सबसे आगे रहे। मित्तल के स्वामित्व वाली देश की नंबर 2 वायरलेस कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड ने सितंबर में अपनी डेटा सेंटर क्षमता को 2025 तक 400 मेगावाट करने के लिए 50 अरब रुपये (671 मिलियन डॉलर) का निवेश करने की योजना की घोषणा की थी। वहीं रिलायंस की डिजिटल यूनिट भी एक डेटा सेंटर के निर्माण की तलाश में है।
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