नई दिल्ली, जनवरी 30। स्वास्थ्य बीमा को और अधिक किफायती बनाने के लिए, बीमा इंडस्ट्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत करने की मांग की है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से अधिक लोगों को स्वास्थ्य बीमा खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। केंद्रीय बजट 2022 से पहले बीमा इंडस्ट्री ने नरेंद्र मोदी सरकार के सामने अपनी मांग रखी। मंगलवार 1 फरवरी को वित्त मंत्री बजट पेश करेंगी।
सस्ता हो जाएगा हेल्थ इंश्योरेंस
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार से स्वास्थ्य बीमा को और अधिक किफायती बनाने के लिए बोनान्ज़ा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीईओ ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल साइंस काफी एडवांस हुई है। हालांकि, इससे ट्रीटमेंट की लागत में भी वृद्धि हुई है। आगामी बजट में, सरकार को स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी को कम करने पर विचार करना चाहिए। स्वास्थ्य बीमा को अधिक किफायती बनाने के लिए प्रीमियम पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाए।
हॉस्पिटल बिल में बढ़ोतरी
एक अन्य बीमा कंपनी के डायरेक्ट के अनुसार पिछले 20 महीनों में देखा गया है कि कैसे महामारी ने तबाही मचाई है। पिछले साल की लहर के दौरान बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हुए और चिकित्सा बिलों में भारी वृद्धि देखी गई। इसलिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने पर विचार करना चाहिए। यह कदम लोगों को मेडिकल संकट और आपात स्थिति से खुद को बचाने के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
टर्म प्लान के लिए अलग सेक्शन
साथ ही टर्म प्लान के लिए अलग सेक्शन की मांग की गयी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि टर्म प्लान के लिए अलग सेक्शन हो सकता है तो यह जीवन बीमा उद्योग के लिए बहुत सकारात्मक होगा। काफी उम्मीदें हैं कि सरकार देश में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के आगामी केंद्रीय बजट में कदम उठाएगी।
छोटी बीमा राशि पर जीएसटी से छूट
छोटे आकार के बीमा उत्पाद जैसे माइक्रो बीमा और छोटी बीमा लिमिट वाले उत्पाद (5,00,000 रुपये तक की बीमा राशि) को जीएसटी से छूट दी जा सकती है। इन उत्पादों को सस्ता बनाकर बीमा के दायरे को बढ़ावा मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सभी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को जीएसटी से पूरी तरह छूट दी जाने का सुझाव भी रखा गया है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर स्टैंप ड्यूटी से पूरी तरह छूट देने की जरूरत बताई गयी है, क्योंकि ये पॉलिसी शुद्ध जोखिम को कवर करती हैं और निवेश उत्पाद नहीं हैं।
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