नयी दिल्ली। आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए यूनियन बजट पेश किया। कई सेक्टरों के लिए बड़े-बड़े ऐलान किए गए। साथ ही कुछ नयी नीतियां लागू करने की भी घोषणा हुई। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी तारीफ की है। वहीं विपक्ष ने बजट को अच्छा नहीं बताया। मगर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का बजट पर क्या कहना है आइए जानते हैं।

अच्छी तरह से बैलेंस्ड बजट
पिरामल ग्रुप के अजय पिरामल के अनुसार ये एक अच्छी तरह से बैलेंस्ड और रियलिस्टिक बजट है। उनके अनुसार ये बजट भारत के मौजूदा बिजनेस को साइकिल और अधिक ठोस आधार देगा। लंबी अवधि की परियोजनाओं की फंडिंग के लिए एक डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (डीएफआई) की शुरुआत इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस को पूरा करेगी।
दशक का सबसे अहम बजट
फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज के प्रकाश छाबड़िया का कहना है कि केंद्रीय बजट 2021, इस दशक का सबसे महत्वपूर्ण बजट है। उनका मानना है कि अनिश्चितताओं के समय में निवेशकों और हितधारकों को स्थिर रखने के लिए सरकार ने अपना सर्वश्रेष्ठ उपाय किए हैं। ऐसा लगता है कि बजट सभी जरूरी क्षेत्रों के लिए मैक्रो स्तर पर आवंटित किया गया है, जो भारत के आर्थिक विकास में मदद करेगा।
उम्मीदों को किया पूरा
नीति आयोद के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार के अनुसार वित्त मंत्री ने बजट को लेकर बहुत सारी उम्मीदें जताई थीं और उन्होंने उन सभी को पूरा किया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बजट भारत की वृद्धि पर केंद्रित है और विकास दर में तेजी लाने के लिए अनुकूल है। एस्सार शिपिंग के सीओओ राहुल भार्गव के अनुसार बजट में नौकरी जनरेट करना सबसे महत्वपूर्ण एजेंडों में से एक रहा है।
विकास पर खर्च को प्राथमिकता
बंधन बैंक के सीईओ सरकार ने इस लेवल पर ग्रोथ पर खर्च को प्राथमिकता दी है। सरकार ने ऐसा इस उम्मीद के साथ किया है कि ग्रोथ से राजकोषीय घाटे का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। एमएसएमई क्षेत्र सहित हेल्थकेयर और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार पैदा होगा।
ईज ऑफ डुइंग बिजनेस
जे सागर एसोसिएट्स के रुपिंदर मलिक कहते हैं कि कॉरपोरेट गवर्नेंस के मोर्चे पर एलएलपी एक्ट, 2008 के तहत डिक्रिमिनेलाइजेशन की उम्मीद की जा रही थी और यह भारत में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के लिए एक अच्छा कदम है। वहीं नियमों के पालन में आसानी के लिए छोटी कंपनियो की परिभाषा बदली गयी है। एस्सार कैपिटल के संजय पाल्वे के मुताबिक यह बैंकिंग और इंफ्रा सेक्टर पर फोकल करने वाला बजट रहा।
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