नयी दिल्ली। हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में टेस्ट सीरीज हरा दी। ये सीरीज कई मायनों में खास रही, जिनमें 32 साल बाद गाबा स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया को किसी भी टीम द्वारा हराया जाना शामिल है। पूरे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारत की इस जीत को सराहा गया। पर अब क्रिकेट के दीवानों के लिए एक और अच्छी खबर आ सकती है। दरअसल बजट में विलो, जिससे क्रिकेट बैट तैयार होते हैं, पर आयात शुल्क में पूरे 50 फीसदी की कटौती की जा सकती है। 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश करने जा रही हैं।
कितनी मिलेगी छूट
विलो पर सरकार इम्पोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी से कम करके 5 फीसदी कर सकती है। यदि इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती होती है तो भारतीय मैन्युफैक्चर्स के लिए अच्छा कदम होगा। असल में कश्मीर से विलो खरीदना मुश्किल हो गया है, और आयातित, विशेष रूप से इंग्लिश, विलो पर निर्भरता बढ़ गई है। अब आयात शुल्क कम होगा तो मैन्युफैक्चर्स ज्यादा विलो आयात कर सकेंगे और प्रोडक्शन बढ़ा सकेंगे।
इंग्लिश और कश्मीरी विलो की डिमांड
प्रोफेश्नल क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले बल्ले आमतौर पर इंग्लिश या कश्मीरी विलो से बने होते हैं। एसजी, एसएस, एसएफ, एमआरएप प्रमुख भारतीय क्रिकेट बैट ब्रांड्स में से हैं। उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के कूकाबूरा, स्पार्टन और इंग्लैंड के गन एंड मूर, ग्रे-निकोलस के साथ होता है। भारत ने 2019-20 में 1.17 करोड़ डॉलर के विलो का आयात किया, जिसमें से आधे से अधिक यूके से आए। वहीं इस दौरान 1.43 करोड़ डॉलर के क्रिकेट बैट और लेग पैड का निर्यात किया गया, जिसमें यूके और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख स्थान रहे।
आयात बिल घटेगा
अगर आयात शुल्क घटता है तो विलो आयात का बिल भी घटेगा। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार स्पोर्ट्स गुड्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने कई खेलों के सामानों के घटकों और कच्चे माल के आयात शुल्क को कम करने का प्रस्ताव सरकार को दिया है। खास कर उन प्रोडक्ट्स के लिए जिनका निर्यात किया जाता है।
रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
क्रिकेट बैट मैन्युफैक्चरिंग के लिए लोगों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में यदि प्रोडक्शन बढ़ता है तो रोजगार भी बढ़ेगा। विलो लकड़ी से एक रेडी और ब्रांडेड बल्ला तैयार करने तक में 8-9 स्टेप्स प्रोसेस होती है। इसमें शिल्प कौशल की आवश्यकता होती है। यूपी का मेरठ प्रमुख बैट विनिर्माण केंद्रों में से एक है। मेरठ बल्लों के लिए काफी मशहूर है।
बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा
ड्यूटी में कटौती से भारत और ब्रिटिश दोनों को फायदा होगा। ब्रिटिश विलो एक्सपोर्ट बढ़ेगा। इससे भारत और यूके के बीच ट्रेड पैक्ट जल्द होने की संभावना बनेगी। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, चीन से पहले ब्रिटेन के साथ एक व्यापार समझौता करना चाहेगा।
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