वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 1 फरवरी को पेश होगा। 1 फरवरी को पेश होने वाला इस बार का बजट कई मायनों में खास है क्योंकि यह कोरोना महामारी के दौर में पेश किया जा रहा है।
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 1 फरवरी को पेश होगा। 1 फरवरी को पेश होने वाला इस बार का बजट कई मायनों में खास है क्योंकि यह कोरोना महामारी के दौर में पेश किया जा रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि बजट में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे जिससे इकोनॉमी को बूस्ट अप मिलेगा। इस बजट से सर्विस सेक्टर को भी बहुत सी उम्मीद हैं लेकिन सबसे बड़ी उम्मीद स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की है।

बढ़कर 1 लाख हो सकता है स्टैंडर्ड डिडक्शन
आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की उम्मीद सबसे ज्यादा है। माना जा रहा है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए तक कर सकती है। इसके अलावा टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट्स के तहत मिलने वाली छूट भी बढ़ सकती है।
जान लें क्या होता है स्टैंडर्ड डिडक्शन
नौकरी करने वाले लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन जाना-माना शब्द है। स्टैंडर्ड डिडक्शन वह रकम है, जिसे साल भर की आमदनी से सीधे घटा दिया जाता है। उसके बाद जो आमदनी बचती है उस पर ही इनकम टैक्स की गणना की जाती है।
वर्क फ्रॉम होम से जुड़े खर्चे और महंगाई के कारण उद्योग संघ फिक्की (एफआईसीसीआई) को पूरी उम्मीद है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के नए ढांचे की घोषणा की थी लेकिन उसमें एनपीएस के अलावा और किसी छूट का प्रावधान नहीं था। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार बजट में कुछ बड़ा ऐलान हो सकता है।
टैक्स फ्री अलाउंस मिलने की उम्मीद
57 फीसदी ने उम्मीद जताई कि बजट में वेतन पाने वाले कर्मचारियों को टैक्स फ्री अलाउंस और पर्क्स दिए जा सकते हैं। वर्क फ्रॉम होम को ध्यान में रखकर ऐसा किया जा सकता है। वहीं, 39 फीसदी महसूस करते हैं कि महामारी से जुड़े इलाज के मद्देनजर मेडिकल खर्चों के लिए अलग डिडक्शन दिया जा सकता है।


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