नयी दिल्ली। गिरती ब्याज दर और बढ़ती महंगाई के कारण वरिष्ठ नागरिक बहुत चिंतित हैं। इनमें से ज्यादातर पेंशन इनकम के साथ-साथ एफडी और पोस्ट ऑफिस योजनाओं जैसी बचत और निवेश विकल्पों से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर हैं। मगर गिरती ब्याज दरों ने वास्तविक रिटर्न (Real Return) को नकारात्मक कर दिया है, जिससे ऐसे लोगों के सामने कड़ी चुनौती है। यही नहीं हेल्थकेयर पर अधिक खर्च भी एक समस्या है, जो हाल के सालों में काफी तेजी से बढ़ा है। इसलिए उन्हें किसी अन्य आयु वर्ग की तुलना में ज्यादा वित्तीय सपोर्ट की आवश्यकता है। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को टैक्सेशन में स्पेशल छूट की भी जरूरी है। बजट 2021 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क्या कर सकती हैं, इस पर एक नज़र डालते हैं।
किराया खर्च के लिए कटौती
उच्च बचत और पेंशन के चलते कई वरिष्ठ नागरिक आर्थिक रूप से स्वतंत्र होते हैं। मगर नैतिक और शारीरिक सहायता के लिए वे अपने बच्चों पर निर्भर होते हैं। इसलिए अपने बच्चों के करीब ही घर लेना पड़ता है और किराये का खर्च उठाना होता है। जॉब करने वालों को इस किराया खर्च पर टैक्स कटौती का लाभ मिलता है, मगर वरिष्ठ नागरिकों को नहीं। घर के किराये पर कटौती वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत जरूरी है।
मेडिकल खर्च पर छूट
धारा 80डी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये प्रति वर्ष तक के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर खर्च में कटौती का प्रावधान है। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है तो उसे 50,000 रुपये तक के चिकित्सा खर्च पर कटौती मिल जाएगी। मगर इनमें से कोई एक बेनेफिट ही मिलता है। बढ़ती चिकित्सा लागतों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा खर्च के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दोनों पर कटौती का लाभ मिलना चाहिए।
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के तहत निवेश की सीमा बढ़ाई जाए
इस योजना के तहत निवेश की सीमा 15 लाख रुपये है, जो वरिष्ठ नागरिकों को इनकम का एक भरोसेमंद स्रोत मुहैया करने के लिए बहुत कम और अपर्याप्त है। इस योजना के तहत सीमा को कम से कम 50 लाख रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को अपने निवेश पर बढ़िया रिटर्न हासिल करने की आवश्यकता होती है ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। इसके लिए इस योजना के तहत निवेश सीमा बढ़ाई जा सकती है।
ब्याज इनकम पर छूट लिमिट बढ़े
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सावधि जमा / बचत बैंक / डाकघर खाता ब्याज से ब्याज आय के मामले में 50,000 रुपये तक की कटौती उपलब्ध है। वरिष्ठ नागरिकों को अधिक वित्तीय स्वतंत्रता देने के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 100,000 रु किया जा सकता है।
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