नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को सुबह 11:00 बजे केंद्रीय बजट 2021 पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। कोरोना संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था को काफी झटका लगा है। इसलिए बजट से उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। खुद सरकार भी कह चुकी है कि ये ऐसा बजट होगा जैसा अभी तक पेश नहीं किया गया है। मगर क्या आप देश के पहले बजट के बारे में जानते हैं? यहां हम आपको पहले बजट सहित 7 ऐतिहासिक चीजों की जानकारी देंगे।
देश का पहला बजट :
- देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया था। यह बजट 31 मार्च 1948 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए था।
- चेट्टी ने इस बजट को ऐतिहासिक करार दिया था, क्योंकि यह आजाद भारत का पहला बजट था। स्वतंत्र भारत के पहले बजट ने अर्थव्यवस्था की समीक्षा की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बजट में कोई प्रस्ताव नहीं किया गया था।
- इसमें 171.15 करोड़ रुपये के बजट राजस्व का लक्ष्य रखा गया था। उस समय राजकोषीय घाटा 26.24 करोड़ रुपये आंका गया था। वर्ष के लिए अनुमानित कुल खर्च 197.29 करोड़ रुपये था। कुल व्यय में से रक्षा सेवाओं के लिए 92.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
बजट पेश करने वाली इंदिरा गांधी पहली महिला
- स्वतंत्र भारत में 1970 में इंदिरा गांधी पहली महिला बनीं जिन्होंने बजट पेश किया। मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद उन्होंने वित्त मंत्रालय संभाला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2019 में स्वतंत्र भारत के इतिहास में बजट पेश करने वाली दूसरी महिला बनीं।
- वर्ष 1999 तक यूनियन बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस को शाम 5:00 बजे पेश किया जाता था। यह प्रथा ब्रिटिश काल से चल रही थी। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 1999 के बजट को सुबह 11 बजे पेश किया और बजट प्रस्तुति की रस्म को बदल दिया।
दो और बड़े बदलाव
- 2016 तक यूनियन बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस को पेश किया जाता था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में इस प्रथा को भी बदल दिया। उस साल उन्होंने 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया था।
- 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ मिला दिया गया। 2016 तक केंद्रीय बजट से कुछ दिन पहले रेल बजट पेश किया जाता था।


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