Budget 2021 : पहली बार घर खरीदने वालों को मिल सकती है राहत

नयी दिल्ली। गैर-सरकारी ट्रेड एसोसिएशन फिक्की ने केंद्रीय बजट 2021 से पहले एक मेमोरेंडम में कहा है कि किफायती आवासों को और अधिक प्रोत्साहन देने की जरूरत है। खास कर मेट्रो शहरों में। 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2021 की अवधि के दौरान मंजूर किए गए हाउसिंग लोन पर देय ब्याज के संबंध में पहली बार घर खरीदन वाले प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कटौती का लाभ उठा सकते हैं। फिक्की ने सिफारिश की है कि फर्स्ट टाइम होमबॉयर्स को दी गई अतिरिक्त कटौती के लिए स्टैंप ड्यूटी वैल्यू को 65 लाख रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए। वर्तमान में प्रॉपर्टी की स्टैंप वैल्यू अधिकतम 45 लाख रुपये हो सकती है।

क्या है फिक्की की दलील

क्या है फिक्की की दलील

फिक्की का कहना है कि स्टैंप ड्यूटी पर इतनी कम सीमा के साथ मेट्रो या टीयर 1 शहर में घर खरीदना मुश्किल है। वर्तमान कटौती से टीयर 2 और टीयर 3 शहरों / टाउन के केवल कम आय वाले उधारकर्ताओं को लाभ मिलने की संभावना है। फिक्की ने सिफारिश की है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पुणे और हैदराबाद जैसे कम से कम मेट्रो और टीयर 1 शहरों के लिए स्टाम्प वैल्यू को बढ़ाकर 65 लाख रुपये करना चाहिए। इससे किफायती आवास की खरीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा।

बढ़ाई जानी चाहिए लिमिट

बढ़ाई जानी चाहिए लिमिट

फिक्की ने ये भी कहा है कि वित्त मंत्री को समय सीमा को 31 मार्च 2021 के बजाय 31 मार्च 2022 तक बढ़ा देना चाहिए। जो कोई भी 31 मार्च 2021 के बाद आवास लोन लेगा उसे इस तरह की कटौती का फायदा नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सरकार वर्ष 2022 तक सभी के लिए घर का प्रयास कर रही है। ऐसे में यह सिफारिश की जाती है कि कटौती के लिए लोन अवधि को कम से कम 31 मार्च 2022 तक बढ़ाया जाना चाहिए।

कैसा रह सकता है बजट

कैसा रह सकता है बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद के बजट सत्र में केंद्रीय बजट 2021 प्रस्तुत करेंगी। बजट 2021 में कोरोना से झटका खाई अर्थव्यवस्था को बूस्टर शॉट मिलने की उम्मीद है।

सस्ता किराया आवास परिसर योजना

सस्ता किराया आवास परिसर योजना

केंद्र सरकार ने गरीब और मजदूर के वर्ग बहुत काम आने वाली योजना भी शुरू की है। इसका नाम है सस्ता किराया आवास परिसर योजना (Affordable Rental Housing Complexes Scheme)। इस योजना में गरीबों को काफी कम किराये पर रहने की जगह मिलती है। इस योजना का ऐलान मई में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत ही हुआ था। योजना का मकसद शहरों में करने वाले मजदूरों को उस जगह के करीब में ही सस्ता घर मुहैया कराना है, जहां वे काम करते हैं।

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