नयी दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश किए जाने में कुछ ही दिन बाकी हैं। इस दौरान कयास लगाए जा रहे हैं कि आम आदमी को टैक्स से क्या राहत दी जा सकती है। धारा 80 सी के तहत मिलने वाली छूट को भी 2 लाख रु तक बढ़ाया जा सकता है। जानकार मानते हैं कि इनकम टैक्स ब्रेकेट में एक बढ़ोतरी बकाया है। यानी टैक्स ब्रेकेट में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। यह ऐसा है जो हर सैलेरी पाने वाला कर्मचारी केंद्रीय बजट में चाहता है। हालांकि पिछले साल टैक्स ब्रेकेट को बढ़ाया गया था। मगर इस पर एक्सपर्ट कहते हैं कि बहुत सारी शर्तों के साथ नए शुरू किए गए टैक्स स्लैब बहुत से करदाताओं के काम नहीं आ रहे हैं।
खपत में हो सकता है सुधार
इस समय मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर है और आने वाले वित्तीय वर्ष में वेतनभोगी लोगों की इनकम में वृद्धि सीमित रह सकती है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा। टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ने से खपत में सुधार हो सकता है। इससे सैलेरी वाले लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा रहेगा। जानकार इसके पीछे तर्क देते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग में भी लगातार सुधार हो रहा है और इसलिए अधिकांश शहरों में रोजमर्रा के खर्चों में वृद्धि हुई है।
धारा 80सी के तहत अधिक कटौती
जहां तक टैक्स छूट का सवाल है टैक्स कटौती का लाभ उठाने के लिए धारा 80 सी के तहत अधिक कटौती एक अच्छा कदम होगा क्योंकि इससे ज्यादा लोग बचत और लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार 80सी के तहत टैक्स छूट को 2 लाख रु तक बढ़ाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स ये भी कहते हैं कि नए घर खरीदारों को अतिरिक्त टैक्स बेनेफिट देने से सैलेरी वाले लोगों के एक वर्ग को घर खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। जानकारों के अनुसार अतिरिक्त टैक्स सेविंग्स बेनेफिट एक अच्छा प्रोत्साहन होगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में भी मांग बढ़ेगी।
एनपीएस पर बढ़े टैक्स छूट
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार को एनपीएस के लिए अतिररिक्त डिडक्शन लिमिट को 50,000 रु से 100,000 रु या 150,000 रु तक बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। आज टैक्स बचाने के लिए कई करदाताओं के लिए धारा 80 सी के तहत मिलने वाली 150,000 रु की छूट पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त कटौती के लिए एनपीएस की सीमा बढ़ने से लोगों को टैक्स बचाने और लंबी अवधि के लिए निवेश करने में मदद मिलेगी। एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) को ईईई स्की बनाए जाने का भी सुझाव दिया गया है। ईईई का मतलब है छूट, छूट, छूट। यानी निवेश अवधि के दौरान मिलने वाले ब्याज, किए गए निवेश और मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि पर टैक्स छूट मिले। पीपीएफ एक ईईई उपकरण है।
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