नयी दिल्ली। 2020-21 के लिए केंद्रीय बजट आने में ज्यादा दिन बाकी नहीं हैं। 1 फरवरी को संसद में बजट में पेश किया जायेगा। बता दें कि 2017 से रेल बजट यूनियन बजट के साथ ही मिला कर पेश किया जाता है। 2016 तक रेल बजट यूनियन बजट से अलग पेश किया जाता था। 2016 में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आखरी बार रेल बजट अलग से पेश किया था। इस लिहाज से प्रभु आखरी रेल मंत्री रहे जिन्होंने अलग रेल बजट पेश किया। 92 साल तक चली रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा 2016 में खत्म हुई। 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार रेल और यूनियन बजट मिला कर पेश किया। आगामी बजट आने में चंद दिन बाकी हैं ऐसे में रेलवे के लिए कितनी राशि आवंटित की जायेगी इसे लेकर अनुमान लगाया जा रहा है।

रेलवे को मिल सकता है रिकॉर्ड पैसा
एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे को 2020-21 के लिए दिये जाने वाले पूँजीगत व्यय या कैपेक्स में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। चालू वित्त वर्ष के लिए रेलवे के लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। 18 फीसदी की बढ़ोतरी के आधार पर 2020-21 के लिए रेलवे को 1.8-1.9 लाख करोड़ रुपये की राशि के आवंटन की घोषणा हो सकती है। अधिकारी के मुताबिक अगले 10 वर्षों के लिए रेलवे ने कैपेक्स में लगभग 18 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर या सीएजीआर से बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है।
पिछले तीन सालों में कितना पैसा मिला
2017 में पहली बार जब रेल और यूनियन बजट मिला कर पेश किया गया तो अरुण जेटली ने रेलवे के लिए 1.3 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। यह उस समय तक रेलवे के लिए सर्वाधिक आवंटन था। इसके बाद 2018 में यह राशि बढ़ा कर 1.48 लाख करोड़ रुपये की गयी और फिर पिछले बजट में रिकॉर्ड 1.6 लाख करोड़ रुपये रेलवे को दिये गये। यानी पिछले लगातार तीन सालों में रेलवे के लिए रिकॉर्ड पैसा दिया गया। आगामी बजट में इस मामले में एक नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है। बता दें कि भारत अपने रेलवे का पूरी तरह से विद्युतीकरण करने वाला आज दुनिया का पहला देश बन गया है। साथ ही अहमदाबाद और मुंबई के बीच पहली हाई-स्पीड, बुलेट ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है।
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