नयी दिल्ली। 2020-21 के लिए पेश किये गये बजट में शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक शानदार फैसला लिया गया है। सरकार ने बजट में लाभांश वितरण कर यानी डीडीटी (Dividend Distribution Tax) को खत्म कर दिया है। इसके हटने का सीधा लाभ शेयर निवेशकों को मिलेगा। डीडीटी एक सरोगेट टैक्स है, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई को प्रभावित करता है। इसलिए इस टैक्स के खत्म होने से निवेश में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। इसका शेयर बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना, क्योंकि विदेशी निवेशकों के लिए अब भारतीय इक्विटी बाजार और अधिक आकर्षक हो जायेगा। इस समय घरेलू कंपनियों को शेयरधारकों को लाभांश देने से पहले 15 फीसदी डीडीटी देना होता है। निवेशकों को 10 लाख रुपये तक के लाभांश पर टैक्स छूट मिलती है।

म्यूचुअल फंड पर भी लगता है डीडीटी
डीडीटी म्यूचुअल फंड्स पर भी लगता है। फंड हाउस डीडीटी एट सोर्स काटते हैं, इसलिए म्यूचुअल फंड योजनाओं का लाभांश शेयरधारकों के लिए टैक्स-फ्री होता है। डेब्ट फंड के लिए डीडीटी व्यक्तियगत 25 फीसदी और कॉर्पोरेट्स के लिए 30 फीसदी है। इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए ये दर 10 फीसदी है, जो सरचार्ज और उपकर के साथ 11.64 फीसदी तक पहुँच जाता है। बता दें कि डीडीटी को शेयरधारकों के बजाय कंपनियों से अधिक डिविडेंड टैक्स कलेक्ट के लिए पेश किया गया था।
भारत के अलावा कहीं नहीं
वर्तमान में, दुनिया के भारत के अलावा किसी अन्य देश में डीडीटी नहीं लगता। भारत में भी 1997 में ही डीडीटी को आयकर कानूनों का हिस्सा बनाया गया था। फिर 2002 में इस टैक्स को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन की आसानी के बहाने अगले साल इसे फिर से लाया गया।
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