SEBI : सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच की तरफ से सोमवार को कहा गया है कि रेगुरेटर शेयर मार्केट में इंस्टेट लेनदेन सेटलमेंट पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं है जब शेयर मार्केट में इंस्टेट लेन देन सेटलमेंट हो जाएगा।
माधवी पुरी बुच की तरफ से कहा गया है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रेगुलेटर लेन- देन के सेटलमेंट की अवधि में सुधार के लिए हितधारकों के साथ कार्य कर रहा है। शेयर मार्केट में टी+1 लागू होगा।

बुच की तरफ से कहा गया है कि रेगुलेटर अर्थव्यवस्था में कैपिटल का निर्माण में सहायता करने के उद्देश्य से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके नई इक्विटी जारी करने में, अन्य हस्तक्षेपों का इस्तेमाल करके नई इक्विटी जारी करने, लोन जारी करने, एमएफ स्कीम्स की मंजूरी की गति में इजाफा करने में कार्य कर रहा है।
बुच ने कहा कि इस प्रकार के हस्तक्षेपों से निवेशक समुदाय को वार्षिक आधार पर 3 हजार 500 करोड़ रु का मौद्रिक लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि मार्केट रेगुलेटर रिवर्स बुक-बिल्डिंग प्रोसेस के बजाएं निश्चित मूल्य के जरिए से कंपनियों की डीलिस्टिंग की अनुमति देने पर भी विचार करेगा।
पूंजी बाजार रेगुलेटर की तरफ से कहा गया है कि दिसंबर तक सेबी की तरफ से इस विषय पर एक चर्चा पत्र जारी किया जायेगा।
किसी भी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों से हटाने के लिए , रिवर्स बुक बिल्डिंग प्रोसेस में, शेयर होल्डर की तरफ से उस प्राइस के लिए प्रस्ताव रखा जाता है। जिस पर वे बड़े शेयर होल्डर्स या प्रमोटरों को प्रतिभूतियां बेचने के इच्छुक होते हैं। फिर इन ऑफर्स के आधार पर डीलिस्टिंग मूल्य की गणना की जाती है।
एक इन्वेस्टर बैंकर से रेगुलेटर बने की तरफ से कहा गया है कि देश एक अर्थव्यवस्था के रूप में बेहतर स्थिति में है। जो कैपिटल के निर्माण में मदद में सेबी की भूमिका के महत्व को बढ़ाता है।


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