PSU Stocks: देश की 7 बड़ी सरकारी कंपनियों पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना ठोका है। इन सरकारी कंपनियों पर एक्सचेंज नियमों का अनुपालन पूरा नहीं करने की वजह से कार्यवाही की गई है। यह सभी पब्लिक सेक्टर की बड़ी कंपनी हैं और इनका मार्केट में भी जबरदस्त दबदबा है। इनमें से दो सरकारी कंपनियां तो ऐसी हैं, जिन पर लगातार दूसरे क्वार्टर में पेनल्टी लगी है।
दूसरे क्वार्टर में पेनल्टी
इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और गेल (इंडिया) शामिल हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि इन दोनों ही कंपनी ने बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के बारे में एक्सचेंज को जानकारी नहीं दी है।

जानें किन सरकारी कंपनियों पर लगा है जुर्माना
स्टॉक एक्सचेंजेस ने आइओसी यानी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, गेल, बीपीसीएल और एचसीएल के अलावा इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड पर भी जुर्माना ठोका है।
इस वजह से ठोका गया जुर्माना
आपको बताते चले कि इन सभी कंपनियों ने बीएसई और एनएसई फाइलिंग के दौरान लगाए गए जुर्माने की बात कही है। कंपनियों ने यह भी कहा है कि इन सरकारी कंपनी में डायरेक्टर्स की नियुक्ति सरकार के द्वारा की जाती है और इसमें उनकी किसी भी तरह की कोई भी भूमिका नहीं होती है। गौरतलब है कि पहले क्वार्टर में भी इन कंपनी पर बोर्ड में शामिल डायरेक्टर्स के बारे में जानकारी नहीं देने की वजह से जुर्माना लगाया गया था।
आपको बताते चलें की कंपनी लिस्टिंग नियमों के अनुसार कंपनियों को अपने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के साथ एग्जीक्यूटिव और दूसरे वर्किंग डायरेक्टर्स के बारे में जानकारी देना अनिवार्य होता है। उन कंपनी के बोर्ड में महिला डायरेक्टर होना भी अनिवार्य बताया गया है। अगर कंपनी यह जानकारी साझा नहीं करती है तो उस पर स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जुर्माना लगाया जाता है।
जानें किस कंपनी पर लगी है कितनी पेनल्टी
इस क्वार्टर में सभी कंपनी पर 5,42,800 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अगर बात की जाए पहले क्वार्टर की तो इस दौरान गेल पर 2.71 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। वहीं ओएनजीसी पर 3.36 लाख और आईओसी पर 5.36 लख रुपए की पेनल्टी लगाई गई थी। इस दौरान एचपीसीएल और बीपीसीएल को 3.6 लाख रुपए जुर्माने के तौर पर भरने पड़े थे। वहीं ऑयल इंडिया पर 5.37 लाख रुपए की पेनाल्टी लगी थी।
कंपनियों ने कहा डायरेक्टर की नियुक्ति उनके हाथ में नहीं
जुर्माना लगने के बाद कंपनियां काफी नाखुश है और उन्होंने भी अपने बयान दिए हैं। इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने एक्सचेंज फाइलिंग में ने कहा है कि वह सरकारी कंपनी है और उसके डायरेक्टर नियुक्त करने की पावर पेट्रोलियम मंत्रालय के पास है। आईओसी के मुताबिक महिला इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति सितंबर में न हो पाना किसी भी तरह से कंपनी की गलती नहीं है।
गेल भी भारत सरकार के पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के अंतर्गत आता है। गेल ने भीकहा कि बोर्ड को लेकर नियमों का अनुपालन नहीं होना कंपनी की गलती नहीं है। मैनेजमेंट ने रेगुलेटरी जरूरत को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं।
वही बीपीसीएल ने बीएसई और एनएसई से जुर्माने में छूट की मांग करेगी। क्योंकि उन्होंने कई बार इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के नॉमिनेशन के लिए रिक्वेस्ट दी थी और यह नियुक्ति सरकार की ओर से नामित किए जाने के बाद ही की जा सकती है, सभी कंपनियों की तरफ भी पीसीएल का कहना भी है कि वह डायरेक्टर्स की नियुक्ति का फैसला नहीं करती है।
इसी तरह एचपीसीएल और ओआईएल ने भी डायरेक्टर की नियुक्ति पर कंट्रोल न होने की बात कही है।
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