Boat Founder Aman Gupta: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के स्टार्टअप्स को लेकर दिए बयान पर काफी गरमागरम बहस मची हुई है। जेप्टो के चीफ एग्जीक्यूटिव आदित पलीचा ने तो टैक्स भुगतान और एफडीआई समेत कई मुद्दों का जिक्र कर दिया था, लेकिन अब Boat के फाउंडर अमन गुप्ता ने पीयूष गोयल के प्रति अपना समर्थन जताया है।

पीयूष गोयल ने स्टार्टअप महाकुंभ में कही थी ये बात (Piyush Goyal remark on indian startups)
दरअसल, पीयूष गोयल ने स्टार्टअप महाकुंभ में कहा था, ' क्या हमें डिलिवरी बॉय या गर्ल ही बनकर खुश हो जाना चाहिए। भारत में हमने डिलिवरी ऐल्स बनाए हैं, जो बहुत तेजी से सामान लोगों तक पहुंचा रहे हैं। हमारी यह स्थिति है, जबकि चीन में आर्टिफिसशियल इंटेलिजेंस पर काम हो रहा है और वे इलक्ट्रिक वीकल्स पर भी तेजी से काम कर रहे हैं।' उनके इस बयान पर अब विवाद शुरू हो गया है। इस बयान से स्टार्टअप इंडस्ट्री के अलग-अलग फाउंडर्स और सीईओ ने अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरु कर दी। अमन गुप्ता ने हाल ही में एक लिंक्डइन पोस्ट करके इसपर रिएक्ट किया है।
अमन गुप्ता ने दिया पीयूष गोयल का साथ (Aman Gupta on indian startups)
अमन गुप्ता ने कहा 'देश के सबसे बड़े स्टार्टअप इवेंट Startup Mahakumbh में कुछ ऐसा सुनने को मिला जो रोज नहीं होता, सरकार ने खुद स्टार्टअप फाउंडर्स से कहा, "और बड़ा सोचो।" मैंने पीयूष गोयल जी का पूरा भाषण सुना और उनकी बातों से साफ है कि वह स्टार्टअप फाउंडर्स के खिलाफ नहीं हैं, वह हम में भरोसा करते हैं। उनका कहना साफ है कि भारत ने अब तक बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन अगर दुनिया का लीडर बनना है, तो और बड़ा सोचना होगा।' उन्होंने कहा- 'इससे मुझे याद आया जो मैं अक्सर शार्क टैंक इंडिया में कहता हूं- अगर आपको वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट बनाना है, तो आपको अपने कॉम्पटीशन को जानना होगा। यही बात भारत पर भी लागू होती है।'
'चीन, अमेरिका जैसे देशों से तुलना करना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। भारत पहले से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी लेकिन अगर हमें नंबर-1 बनना है तो हमें AI, डीपटेक, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में भी सही से काम करना होगा और साथ LLMs (Large Language Models) और ग्लोबल लेवल का इनोवेशन करना होगा।' इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए हमें Scientific risk लेने की हिम्मत चाहिए. साथ ही लंबे समय तक निवेश करने वाली पूंजी की भी जरूरत होगी। Founders और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत साझेदारी होना जरूरी है, तभी एक लॉन्ग-टर्म नेशनल विजन बन सकता है।


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