नयी दिल्ली। आपने गेहूं बहुत बार देखा होगा। गेहूं का रंग भी आपको बखूबी मालूम होगा। पर क्या आप जानते हैं कि गेहूं की एक किस्म काले रंग की भी होती है। जी हां चौंकिये मत काले रंग का गेहूं भी होता है। ये गेहूं सेहत के लिए सामान्य गेहूं से ज्यादा अच्छा होता है। इतना ही नहीं ये काला गेहूं किसानों के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। किसान काले गेहूं से अच्छी कमाई कर रहे हैं। एक्सपर्ट भी काले गेहूं की खेती करने की सलाह दे रहे हैं। किसानों को इस काले गेहूं से जम कर कमाई करने का मौका मिल रहा है। ये काला गेहूं डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी लाभदायक होता है। अच्छी बात ये है कि यूपी में कई जगह अब काले गेहूं की खेती बढ़ रही है। पहले के मुकाबले ज्यादा किसान इस खास गेहूं की फसल पर काम कर रहे हैं।
कब तक है इस गेहूं की बुवाई का मौका
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार कृषि से जुड़े एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये वक्त काले गेहूं की खेती के लिए काफी अच्छा है। यानी इस समय काले गेहूं की खेती की शुरुआत (बुवाई) की जा सकती है। ये समय ऐसा है जब खेतों में नमी होगी और काले गेहूं के लिए इसी चीज की जरूरत है। किसानों के पास नवंबर के पूरे महीने में ये खास खेती करने का मौका है। इसके बाद यदि काले गेहूं की बुवाई की गई तो फसल तो होगी मगर कम। यानी पैदावार में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए जितना जल्दी हो सके इस गेहूं की खेती की शुरुआत की जानी चाहिए।
कितनी होती है कमाई
काले गेहूं की फसल की 2 अहम विशेषताएं हैं। इनमें पहला है ज्यादा पैदावार। काले गेहूं की फसल अधिक होती है। दूसरा है कमाई। काले गेहूं से किसानों को ज्यादा कमाई होती है। बता दें कि काला गेहूं सामान्य गेहूं के मुकाबले दोगुने रेट पर बिकता है। यानी ये प्रति क्विंटल 4-6 हजार रु की कमाई करवा सकता है। इसीलिए अब काफी संख्या में किसान काले गेहूं की खेती की तरफ ध्यान दे रहे हैं। उदाहरण के लिए रायबरेली (यूपी) में पिछले साल सिर्फ 8 किसान ऐसे थे, जिन्होंने काला गेहूं बोया था। मगर इस साल ऐसे किसानों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है।
कितनी होती है पैदावार
काले गेहूं की पैदावार भी काफी अच्छी होती है। एक बीघे में 1000 से 1200 किलो तक काला गेहूं पैदा हो सकता है। आपको बता दें कि काले गेहूं की फसल सामान्य गेहूं के जैसे ही होती है। मगर कृषि जानकार कहते हैं कि काले गेहूं की बुवाई के लिए सीडड्रिल की मदद ली जानी चाहिए। इससे ऊर्वरक और बीज की बचत होगी। जहां तक काले गेहूं के बीजों का सवाल है तो बाजार में उपलब्ध होते हैं।


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